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भरतपुर का 'अपना घर आश्रम' बना दुनिया का सबसे बड़ा महिला आश्रय गृह

Prathakal 4 months ago

गंगापुर सिटी। मानवता की सेवा, करुणा और नि:स्वार्थ समर्पण की पावन भूमि भरतपुर ने वैश्विक पटल पर एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है, जिस पर पूरे देश को गर्व है। भरतपुर के बझेरा स्थित 'अपना घर आश्रम' अब आधिकारिक रूप से दुनिया का सबसे बड़ा महिला आश्रय गृह (Largest Homeless Shelter - Female) बन गया है, और इस संस्था का नाम अब प्रतिष्ठित गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि की प्रक्रिया के तहत, गिनीज बुक के अधिकृत जज और रिकॉर्ड टीम के प्रमुख ऋषिनाथ के नेतृत्व में आई टीम ने दो दिनों तक अपना घर आश्रम की व्यवस्थाओं, दस्तावेजों और भवन क्षमता का गहन जमीनी सत्यापन किया। ऑनलाइन स्क्रूटनी के छह महीने बाद हुए इस ऑफलाइन वेरिफिकेशन में सभी वैश्विक पैमानों पर खरा उतरने के बाद, अपना घर संस्था को विश्व रिकॉर्ड का आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंपा गया। आश्रम की व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी कहीं बेहतर पाई गईं।

अपना घर सेवा समिति महुवा के मीडिया प्रभारी गोपुत्र अवधेश अवस्थी ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि अब तक अमेरिका के मियामी स्थित 'लोटस हाउस वूमन शेल्टर' को दुनिया का सबसे बड़ा महिला शेल्टर माना जाता था, जहां करीब 1,500 महिलाओं, युवाओं और बच्चों को आश्रय मिलता है। इसके विपरीत, भरतपुर के अपना घर आश्रम ने 3,295 निराश्रित एवं असहाय महिलाओं के प्रमाणित आंकड़े के साथ अमेरिका के इस रिकॉर्ड को बहुत पीछे छोड़ दिया है। शनिवार को आश्रम में मौजूद महिला आवासियों की कुल संख्या 3,473 दर्ज की गई थी, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल नहीं हैं।

गिनीज बुक की टीम ने धरातल पर जांच के दौरान पाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति 100 वर्ग फुट जगह का मानक तय है, जबकि अपना घर आश्रम में प्रत्येक महिला आवासी को 126 वर्ग फुट की खुली और सम्मानजनक जगह उपलब्ध कराई जा रही है। यह पूरा आश्रम 9.10 लाख वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में फैला है, जिसके 5.22 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त निर्माण किया गया है। यहां आवासियों के लिए हाइजीन, नियमित चिकित्सा और पौष्टिक भोजन की विशेष और उत्तम व्यवस्था है।

अपना घर आश्रम के संस्थापक डॉ. बी.एम. भारद्वाज ने इस ऐतिहासिक क्षण पर कहा कि यह रिकॉर्ड ईंट-पत्थरों या संसाधनों का नहीं, बल्कि उस सेवा भावना की जीत है जो हर बेसहारा को 'प्रभुजी' यानी ईश्वर का रूप मानकर सेवा प्रदान करती है। सन 2000 से बझेरा में शुरू हुई यह संस्था पिछले ढाई दशक में 14,710 बेसहारा महिलाओं का सफल इलाज और पुनर्वास करवाकर उन्हें उनके परिवारों से पुनः मिला चुकी है। वर्तमान में देशभर में अपना घर के 57 आश्रम संचालित हैं, जिनमें कुल 12,000 से अधिक आवासी आश्रय पा रहे हैं और इनमें महिला प्रभुजियों की संख्या लगभग 6,500 है। भरतपुर के 'अपना घर आश्रम' को मिला यह वैश्विक सम्मान यह सिद्ध करता है कि जब सेवा का संकल्प अटूट हो, तो वह दुनिया के नक्शे पर सबसे चमकदार सितारा बनकर उभरता है।

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