
राजस्थान के भरतपुर जिले के रूपवास कस्बे में शराब के ठेके के स्थानांतरण को लेकर उपजा विवाद अब उग्र रूप धारण करता जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने जिला कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी भरतपुर को लिखित शिकायत प्रेषित कर जाटव एवं हरिजन बस्ती के समीप शराब की दुकान शिफ्ट करने के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की पुरजोर मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रूपवास में वर्तमान में दामोदर नामक व्यक्ति द्वारा तीन शराब की दुकानें संचालित की जा रही हैं, जहाँ सभी प्रकार की अंग्रेजी, देशी शराब और बीयर उपलब्ध है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा अब एक दुकान को दुर्भावनापूर्ण तरीके से उस क्षेत्र में स्थानांतरित किया जा रहा है, जहाँ की लगभग 85 प्रतिशत आबादी दलित समुदाय से ताल्लुक रखती है। ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है कि प्रस्तावित स्थान के मात्र 75 मीटर के दायरे में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति, सार्वजनिक पार्क और साईं बाबा का मंदिर स्थित है। ऐसे में घनी आबादी और धार्मिक स्थलों के पास शराब का ठेका खुलने से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने और धार्मिक भावनाओं के आहत होने की गंभीर आशंका बनी हुई है।
इस पूरे प्रकरण में स्थानीय लोगों ने आबकारी विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कथित रूप से रिश्वत के लेन-देन के आधार पर इस विवादास्पद स्थानांतरण की अनुमति दी गई है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल ही में गांव जरेला में अवैध शराब ठेके के विरुद्ध हुए सफल जन आंदोलन की खीझ निकालने और बदले की भावना से यह कदम उठाया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश को रद्द नहीं किया गया, तो क्षेत्र में बड़ा जन आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
