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भीलवाड़ा में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, पुरुषोत्तम मास पर विशेष आयोजन

Prathakal 4 months ago

सनातन सेवा समिति, हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के सानिध्य में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर भीलवाड़ा में भव्य श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।

आयोजन के प्रथम दिवस कथाव्यास पूज्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज (जबलपुर) ने विधि-विधान से श्रीमद भागवत जी को व्यास पीठ पर स्थापित करने के पश्चात श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य तथा राजा परीक्षित एवं परमज्ञानी श्री शुकदेव जी महाराज के पावन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। इससे पूर्व महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन ने कथा व्यास स्वामी अशोकानंद जी महाराज का आत्मीय अभिनंदन किया।

व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण समस्त वेदों, उपनिषदों एवं शास्त्रों का परम सार है। यह पवित्र ग्रंथ साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वाङ्मय स्वरूप है, जिसके श्रवण, मनन एवं निरंतर चिंतन से जीव के हृदय में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है। उन्होंने बल देकर कहा कि भागवत कथा कलियुग में मोक्ष प्रदान करने वाली दिव्य ज्ञानगंगा है, जो मानव जीवन को परमात्मा से सीधे जोड़ने का सर्वोच्च कार्य करती है।

कथा प्रवाह को आगे बढ़ाते हुए महाराज श्री ने राजा परीक्षित के प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि महाभारत युद्ध के उपरांत जन्मे राजा परीक्षित को ऋषि पुत्र श्रृंगी के श्रापवश सातवें दिन तक्षक नाग के दंश से मृत्यु होने का समाचार मिला था। इस विकट परिस्थिति में राजा परीक्षित ने तत्क्षण सांसारिक मोह-माया का पूर्ण त्याग कर दिया और गंगा तट पर पहुंचकर ऋषियों के सम्मुख यह यक्ष प्रश्न रखा कि मृत्यु निकट होने पर मनुष्य को क्या करना चाहिए और किसका स्मरण करना चाहिए। इसी संकटकाल में परम विरक्त एवं ब्रह्मज्ञानी श्री शुकदेव जी महाराज का वहां आगमन हुआ। राजा परीक्षित के व्याकुल प्रश्नों के उत्तर में उन्होंने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का अमृतपान कराया। इस अलौकिक कथा श्रवण के प्रभाव से राजा परीक्षित को परम ज्ञान की प्राप्ति हुई और उन्होंने भगवान के चरणों में अपना सर्वस्व जीवन समर्पित कर अंततः मोक्ष प्राप्त किया। स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने रेखांकित किया कि परीक्षित और शुकदेव का यह संवाद संपूर्ण मानव जीवन के लिए एक महान आदर्श है। यह प्रसंग सिखाता है कि जीवन का प्रत्येक क्षण भगवान के स्मरण, सत्संग और धर्ममय आचरण में ही व्यतीत होना चाहिए, क्योंकि भागवत कथा मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर सीधे ईश्वर की अनन्य भक्ति की ओर अग्रसर करती है।

इस दिव्य प्रवचन के दौरान उपस्थित श्रद्धालु पूरी तरह भक्ति रस में सराबोर होकर कथा श्रवण करते रहे और संपूर्ण आश्रम परिसर भगवान के गगनभेदी जयघोष एवं भजनों से लगातार गुंजायमान रहा। धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में आज आयोजित विष्णु यज्ञ में मुख्य यजमान चांद मल सोमानी ने पूर्ण श्रद्धा भाव से आहुतियाँ दीं एवं देवाधिदेव महादेव का विधिपूर्वक रुद्राभिषेक संपन्न किया।

उल्लेखनीय है कि इस पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत हरि शेवा उदासीन आश्रम में प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक, संकीर्तन, गंगा आरती एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान अगाध श्रद्धा और अभूतपूर्व उत्साह के साथ संपन्न हो रहे हैं। आश्रम के पूज्य संत मायाराम और संत गोविन्दराम ने सनातन धर्म के सभी श्रद्धालुओं से पुरुषोत्तम मास के इस दुर्लभ अवसर पर भीलवाड़ा में बह रही धर्मगंगा की इस पावन त्रिवेणी का अधिक से अधिक लाभ लेने का पुरजोर आग्रह किया है। इस भव्य धार्मिक महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर संत ईशान राम एवं संत सुयज्ञ राम सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित थे।

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