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चांदी की चमक तेज- कीमतों ने छुआ नया शिखर, ₹2.60 लाख के पार भाव

Prathakal 3 weeks ago

भारतीय वित्तीय राजधानी मुंबई के सराफा बाजार में चांदी की कीमतों ने एक नया और ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। वैश्विक बाजार में बहुमूल्य धातुओं की बढ़ती मांग और औद्योगिक खपत में आए उछाल के बीच चांदी के भाव अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक पर पहुंच गए हैं।

वर्तमान बाजार आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में चांदी की कीमत ₹260 प्रति ग्राम के स्तर को छू गई है। इस वृद्धि ने न केवल खुदरा खरीदारों बल्कि बड़े निवेशकों और औद्योगिक घरानों के बीच भी गहरी चिंता और हलचल पैदा कर दी है।

बाजार में चांदी की इस तीव्र गति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब एक किलोग्राम चांदी खरीदने के लिए उपभोक्ताओं को ₹2,60,000 की भारी भरकम राशि चुकानी पड़ रही है। यह उछाल पिछले कुछ महीनों के रुझानों के मुकाबले काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुंबई के झवेरी बाजार जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी की आपूर्ति में कमी और सौर ऊर्जा तथा इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्रों से बढ़ती मांग ने घरेलू कीमतों को इस स्तर पर धकेल दिया है।

आधिकारिक और कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो चांदी की इन कीमतों में स्थानीय कर, वस्तु एवं सेवा कर (GST) और आयात शुल्क का बड़ा योगदान होता है। भारतीय बाजार में चांदी की कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज के भावों और मुद्रा विनिमय दर (डॉलर बनाम रुपया) पर निर्भर करती हैं। वर्तमान में भारतीय रुपया अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिस स्थिति में है, उसने आयातित चांदी को और अधिक महंगा बना दिया है। इसके अलावा, हॉलमार्किंग और शुद्धता के मानकों के कड़ाई से पालन ने भी संगठित क्षेत्र में चांदी के व्यापार को एक नई दिशा दी है।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि चांदी का ₹2.60 लाख प्रति किलोग्राम के पार जाना भविष्य के मुद्रास्फीति के संकेतों की ओर इशारा करता है। चांदी केवल एक आभूषण धातु नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक धातु भी है, जिसका उपयोग मोबाइल फोन से लेकर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तक में होता है। ऐसे में कीमतों में यह अनियंत्रित वृद्धि इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों की उत्पादन लागत को भी प्रभावित कर सकती है।

अंततः, मुंबई के सराफा बाजार में आई यह तेजी वैश्विक आर्थिक समीकरणों के बदलते स्वरूप का परिणाम है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए, जो चांदी को एक किफायती निवेश और उपहार का माध्यम मानते थे, यह नई दर एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आने के बाद कीमतें नीचे आती हैं या फिर चांदी की यह चमक इसी तरह निवेशकों की जेब पर भारी पड़ती रहेगी।

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