
नर सेवा ही नारायण सेवा है और जीव दया से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। इसी सेवा भाव, करुणा, संवेदना एवं मानवीय मान्यताओं को आत्मसात करते हुए भारतीय जैन मिलन शाखा द्वारा चित्तौड़गढ़ में एक विशाल सेवा प्रकल्प का गरिमामय समापन किया गया।
ग्रुप के पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा आयोजित इस संपूर्ण कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कई कल्याणकारी कार्य किए गए, जिसने स्थानीय स्तर पर सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश की है।
इस वृहद सेवा प्रकल्प की शुरुआत गांधीनगर स्थित गौशाला से हुई, जहाँ ग्रुप के सदस्यों और पदाधिकारियों ने पहुँचकर गायों के लिए चारे की व्यवस्था की और उसे वितरित कर जीव दया के संकल्प को पूरा किया। इसके पश्चात् सेवा का यह कारवां राजकीय सांवलियाजी चिकित्सालय पहुँचा, जहाँ चिकित्सालय की भोजनशाला में भर्ती 101 रोगियों के जरूरतमंद परिवारजनों के लिए शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन की व्यवस्था कर उन्हें संबल प्रदान किया गया। इस मानवीय कार्य के दौरान ग्रुप की ओर से चिकित्सालय में निरंतर संचालित होने वाली रोगी सहायता समिति के सत्यनारायण ईनाणी सहित वहाँ मौजूद अन्य निष्ठावान सेवादारों का पगड़ी पहनाकर और उपरना ओढ़ाकर भव्य सम्मान भी किया गया।
गौ सेवा और भोजन व्यवस्था के इस पुनीत कार्य के बाद जैन धर्मशाला में संचालित हो रहे छाछ वितरण केंद्र पर भी ग्रुप के सदस्यों ने अपनी सक्रिय सेवाएँ प्रदान कीं। अशोक कुमार सेठिया ने इस पूरे सेवा प्रकल्प की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय जैन मिलन शाखा के इस सेवा प्रकल्प में बसंतीलाल वैद, राजेन्द्र गोधा, नवनीत मोदी, रमेश जैन, पारस जैन, मनोरमा अजमेरा, शकुन्तला सेठिया, आशा जैन, मानकंवर जैन, नवीन पटवारी, विजय जुआ, महावीर जैन, नवीन वर्डिया, सुनिल छाजेड़ तथा राकेश बोरदिया सहित समाज के कई गणमान्य महिला एवं पुरुष पदाधिकारी और सदस्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे। शाखा का यह सेवा प्रकल्प समाज में करुणा, संवेदनशीलता और निस्वार्थ मानव सेवा के संदेश को सुदृढ़ता से प्रसारित करने में पूरी तरह सफल रहा है।
