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चित्तौड़गढ़: प्रधानाचार्य पदोन्नति तिथि विसंगति के खिलाफ रेसा का प्रदर्शन

Prathakal 4 months ago

राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) के बैनर तले व्याख्याता से प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नत हुए कार्मिकों ने पदोन्नति तिथि अंकन संबंधी गंभीर विसंगतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस प्रकरण को प्रधानाचार्यों के साथ सरासर अन्याय करार देते हुए, राज्यव्यापी अभियान के तहत सोमवार को चित्तौड़गढ़ में जनप्रतिनिधियों और जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्यायोचित तिथि अंकन की पुरजोर मांग की गई।

राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद के जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार जैन के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने चित्तौड़गढ़ के सांसद सी.पी. जोशी, विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और जिला कलक्टर डॉ. मंजू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें विस्तार से ज्ञापन प्रस्तुत कर पदोन्नत प्रधानाचार्यों के पदोन्नति तिथि अंकन संबंधी तमाम प्रकरणों का अविलंब एवं न्यायसंगत निराकरण सुनिश्चित करने का पुरजोर आग्रह किया। इस संवेदनशील और वाजिब मांग पर त्वरित संज्ञान लेते हुए विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने मौके से ही माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट से दूरभाष पर वार्ता की और उनसे प्रधानाचार्यों की चयन तिथि को अविलंब अंकित करने का कड़ा आग्रह किया। इसके साथ ही विधायक आक्या ने इस गंभीर समस्या को राज्य के शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा सचिव को भी आधिकारिक ईमेल के जरिए प्रेषित कर त्वरित समाधान की अनुशंसा की।

इस प्रशासनिक विसंगति के कानूनी और सेवा संबंधी पहलुओं को रेखांकित करते हुए संगठन के जिला मंत्री भगवान लाल सुधार ने बताया कि पदोन्नति तिथि का सही अंकन न होने के कारण वर्ष 2015-16 से लेकर वर्ष 2019-20 तक की अवधि में पदोन्नत हुए अनेक प्रधानाचार्य अपनी वास्तविक वरिष्ठता और मिलने वाले समस्त सेवा लाभों से पूरी तरह वंचित हो रहे हैं। इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्रदेश के वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों में व्यापक असंतोष और गहरा रोष उपज रहा है।

इस महत्वपूर्ण विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान आनंद कुमार दीक्षित, विनोद राठी, भेरू लाल वीरवाल, राजकुमार तोलंबिया, अनुराधा आर्य, अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी शंभूलाल सोमानी, संजय कोदली, डॉ. कनक जैन, दिनेश जोशी, हरीश न्याति, शंभू लाल जाट, उमेश खटीक, रमेशचंद्र अग्रवाल, सुभाषचंद्र मेडतवाल, हिमांशु जानी, राकेश कुमार तिवारी, घनश्याम जाजपुरा, लक्ष्मी माली, ज्योति लड्ढा एवं कैलाशचंद्र धाकड़ सहित भारी संख्या में प्रधानाचार्य एवं पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (पीईईओ) विशेष रूप से उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने अंत में जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से इस अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण विषय को राज्य सरकार के समक्ष बेहद प्रभावी रूप से उठाने और इसका शीघ्र व स्थाई समाधान सुनिश्चित कराने का पुरजोर आग्रह किया, ताकि पीड़ित प्रधानाचार्यों को उनका वाजिब हक मिल सके।

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