
कृषि को उन्नत और लाभकारी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखाई दे रहे हैं।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने किसानों की आय और उत्पादन क्षमता दोनों में उल्लेखनीय सुधार किया है।
इसी क्रम में डीग जिले के ग्राम पंचायत सुनेहरा से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है, जहां युवा और प्रगतिशील किसान हेमंत शर्मा ने कृषि विभाग की योजनाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए प्राकृतिक खेती में नवाचार स्थापित किया है। हेमंत शर्मा ने बताया कि उन्होंने प्राकृतिक खेती से संबंधित योजनाओं का पूरा लाभ उठाया है और गोबर से खाद बनाने की विधि को अपनाया है। इसके लिए उन्होंने आवश्यक ड्रम व अन्य मशीनरी खरीदी, जिस पर कृषि विभाग द्वारा उन्हें 4,000 रुपये का अनुदान प्रदान किया गया।
हेमंत शर्मा ने बताया कि वे प्राकृतिक तरीके से जीवामृत और बीजामृत तैयार कर रहे हैं, जिनका उपयोग वे अपनी फसलों और सब्जियों में कर रहे हैं। इन जैविक उपायों के प्रयोग से उनकी पैदावार में सुधार हुआ है और उत्पादित फसलों एवं सब्जियों की गुणवत्ता भी उत्कृष्ट बनी है। उन्होंने बताया कि वे इस प्राकृतिक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अपने साथी किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं, जिससे अन्य किसानों को भी इसका लाभ मिल रहा है।
इसके अतिरिक्त, हेमंत शर्मा ने कृषि विभाग से उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले बीजों का लाभ भी प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि इन बीजों के उपयोग से उनकी पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कृषि विभाग की कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि विभाग का कार्य "सुपर और बेस्ट" है तथा विभाग की योजनाएं धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू हो रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे स्वयं इन योजनाओं का लाभ ले रहे हैं और अन्य किसानों को भी इनके बारे में जानकारी देकर जागरूक कर रहे हैं।
हेमंत शर्मा की यह सफलता इस तथ्य को प्रमाणित करती है कि जब किसान और सरकार मिलकर प्राकृतिक खेती और उन्नत तकनीकों को अपनाते हैं, तो न केवल किसानों की आय में वृद्धि होती है, बल्कि कृषि क्षेत्र में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन भी संभव होता है।
