Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story

इंद्रोदा पार्क में 600 बेजुबानों को मिली राहत; वन्यजीवों को बचाने के लिए शुरू हुआ विशेष 'कूलिंग मिशन'

Prathakal 4 months ago

Indroda Nature Park Gandhinagar : गुजरात में आसमान से बरसती आग और रिकॉर्ड तोड़ते पारे ने इंसानों के साथ-साथ जंगलों और चिड़ियाघरों में कैद बेजुबान वन्यजीवों का जीना भी मुहाल कर दिया है।

राज्य में लगातार पैर पसारती हीटवेव के जानलेवा प्रकोप के बीच गांधीनगर स्थित प्रसिद्ध इंद्रोदा नेचर पार्क से राहत और मुस्तैदी की एक बेहद महत्वपूर्ण कहानी सामने आई है। इस समय जब समूचा सूबा भीषण गर्मी की चपेट में आकर झुलस रहा है, तब पार्क प्रशासन ने यहां मौजूद 600 से अधिक वन्यजीवों को मौत के मुंह से खींचने और उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए एक अभूतपूर्व 'कूलिंग मिशन' शुरू किया है। इस अभियान का एकमात्र मकसद प्रकृति के इन अनमोल जीवों को चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों से सुरक्षित रखना है।

इस बड़े रेस्क्यू और राहत कार्य को सीधे सरकारी स्तर पर मॉनिटर किया जा रहा है। राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और राज्य मंत्री प्रवीण माली के विशेष मार्गदर्शन में गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन द्वारा इन जीवनरक्षक इंतजामों को अमलीजामा पहनाया गया है। सरकारी आदेशों के तहत यह विशेष व्यवस्था अप्रैल महीने के शुरुआती दिनों से ही लागू कर दी गई थी, जिसे आगामी मानसून के आगमन तक पूरी तरह सक्रिय रखा जाएगा ताकि मौसम के इस कड़े मिजाज से जानवरों को कोई नुकसान न पहुंचे। वर्तमान में इस विशाल पार्क के भीतर तीन शेर, दो बाघ, तीन तेंदुए, कई मगरमच्छ, साही, दुर्लभ प्रजाति के सरीसृप और सैकड़ों पक्षी निवास कर रहे हैं, जिनकी सुरक्षा प्रशासन के लिए इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पार्क के भीतर वन्यजीवों के बाड़ों को वातानुकूलित और रहने योग्य बनाए रखने के लिए आधुनिक और पारंपरिक दोनों ही तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेष रूप से मांसाहारी जानवरों और सरीसृप गृह (रेप्टाइल हाउस) के कमरों को ठंडा रखने के लिए 15 बड़े एयर कूलर स्थापित किए गए हैं। इन कूलरों को दिन के सबसे तपते प्रहर यानी दोपहर के समय लगातार चलाया जाता है ताकि जानवरों के आंतरिक शारीरिक तापमान को नियंत्रित रखा जा सके और वे हीट स्ट्रोक का शिकार न हों। इसके समानांतर, खुले मैदानों और बाड़ों के बाहरी हिस्सों में 20 हाई-प्रेशर पॉप-अप स्प्रिंकलर लगाए गए हैं, जो दोपहर 1 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक स्वचालित रूप से चलते हैं। इन स्प्रिंकलर्स से निकलने वाली पानी की महीन फुहारें हवा में मौजूद गर्माहट को सोख लेती हैं। इसके साथ ही, सदियों पुराने पारंपरिक तरीके को अपनाते हुए बाड़ों के चारों ओर खस की टट्टियां बांधी गई हैं, जिन्हें कर्मचारी नियमित रूप से पानी से गीला रखते हैं ताकि बाहर से आने वाली गर्म लू ठंडी हवा के झोंकों में तब्दील हो सके। धूप की सीधी किरणों को रोकने के लिए पूरे परिसर में विशेष प्रकार के एग्रो-नेट शेड्स भी ताने गए हैं।

तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर किए गए इन व्यापक प्रबंधों के परिणाम भी काफी सकारात्मक देखने को मिल रहे हैं। पार्क प्रबंधन की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, एयर कूलर, स्प्रिंकलर्स और कृत्रिम छाया के इस त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र की बदौलत जानवरों के बाड़ों के भीतर का तापमान बाहरी वातावरण की तुलना में करीब 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कम दर्ज किया जा रहा है। तापमान में आई यह गिरावट परिसर के भीतर एक नियंत्रित 'माइक्रोक्लाइमेट' (सूक्ष्म जलवायु) का निर्माण कर रही है, जो इन जीवों को उनके प्राकृतिक माहौल जैसा अहसास कराने में मददगार साबित हो रही है।

केवल बाहरी वातावरण ही नहीं, बल्कि अंदरूनी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए पशु चिकित्सकों के एक विशेष पैनल ने जानवरों के पूरे डाइट चार्ट को भी बदल दिया है। गर्मी के इस मौसम में पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, इसके लिए मांसाहारी पशुओं के दैनिक मांस की मात्रा में 500 ग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक की कटौती की गई है। वहीं दूसरी ओर, शाकाहारी वन्यजीवों और पक्षियों के भोजन में तरबूज, खरबूजा और खीरा जैसे पानी से प्रचुर मात्रा वाले फलों को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है ताकि उनके शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की स्थिति पैदा न हो। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने और लू से होने वाली घातक बीमारियों से बचाने के लिए शाकाहारी जीवों के पेयजल और भोजन में विटामिन-सी आधारित ओआरएस और मल्टी-मिनरल विटामिन मिश्रण का नियमित रूप से छिड़काव किया जा रहा है।

प्रशासनिक मुस्तैदी का दायरा सिर्फ पिंजरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पार्क के विशाल खुले वन क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले लंगूर, नीलगाय, मोर और साही जैसे वन्यजीवों का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। प्राकृतिक जंगलों के बीच कई कृत्रिम जलस्रोत और हौद बनाए गए हैं, जिन्हें चिड़ियाघर के कर्मचारी चौबीसों घंटे साफ रखते हैं और पानी से लबालब भरते हैं। किसी भी संभावित स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए पार्क परिसर में 24 घंटे समर्पित पशु चिकित्सा सेवाएं एक्टिव मोड पर हैं, जहां डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें हर घंटे जानवरों के व्यवहार और उनकी शारीरिक गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही हैं। वन विभाग का यह चौतरफा प्रयास न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि गंभीर पारिस्थितिक संकट और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मूक प्राणियों के जीवन की रक्षा करना मानव सभ्यता की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक होना चाहिए।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Prathakal