
Invest India investment 2025-26 : वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने निवेश के मोर्चे पर एक ऐसी छलांग लगाई है, जो 'विकसित भारत 2047' के विजन को नई ऊर्जा प्रदान कर रही है।
भारत सरकार की राष्ट्रीय निवेश प्रोत्साहन और सुविधा एजेंसी, 'इन्वेस्ट इंडिया' ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 6.1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य की 60 रणनीतिक परियोजनाओं को सुगम बनाया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के तत्वावधान में संचालित इस एजेंसी के इन प्रयासों का सीधा सकारात्मक असर देश के 14 राज्यों में देखने को मिल रहा है, जहाँ करीब 31,000 से अधिक नए रोजगार सृजित होने का अनुमान है। यह आंकड़ा न केवल भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक निवेशकों के अटूट भरोसे का भी प्रमाण है।
इस निवेश प्रवाह का सबसे दिलचस्प पहलू इसकी भौगोलिक विविधता है। कुल निवेश में लगभग 42% की भारी हिस्सेदारी अकेले यूरोपीय देशों से आई है, जो भारत और यूरोप के बीच प्रगाढ़ होते आर्थिक सेतु की पुष्टि करता है। इसके अलावा, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों की निरंतर भागीदारी ने भारत के नियामक वातावरण और पारदर्शी नीतियों को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित किया है। डीपीआईआईटी के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया के अनुसार, यह तेजी केंद्र सरकार की नीतिगत स्पष्टता और संस्थागत प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया है कि प्रक्रियाओं के निरंतर सरलीकरण से इस निवेश को न केवल नवाचार बल्कि दीर्घकालिक मूल्य में बदला जाएगा, जिससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को भी बल मिलेगा।
रणनीतिक रूप से, इन्वेस्ट इंडिया ने अपनी भूमिका को केवल निवेश लाने तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि 'प्रारंभिक सलाह' से लेकर 'निवेश के बाद की देखभाल' तक एक सुदृढ़ तंत्र विकसित किया है। वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में वास्तविक निवेश में करीब तीन गुना की वृद्धि और औसत सौदे के आकार में 1.8 गुना का इजाफा यह स्पष्ट करता है कि अब भारत उच्च मूल्य वाली और बड़े पैमाने की परियोजनाओं का पसंदीदा गंतव्य बन चुका है। सेक्टर के लिहाज से देखें तो रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में कुल निवेश का 65% हिस्सा केंद्रित रहा, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, रक्षा और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) जैसे उभरते क्षेत्रों ने भी वैश्विक दिग्गजों को अपनी ओर आकर्षित किया है।
राज्यों के स्तर पर इस निवेश का विस्तार भारतीय संघवाद की मजबूती को दर्शाता है। गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जहाँ निवेश के मुख्य केंद्र बने रहे, वहीं असम, बिहार और सिक्किम जैसे राज्यों में नई परियोजनाओं की शुरुआत ने एक संतुलित क्षेत्रीय विकास की उम्मीद जगाई है। विशेष रूप से रोजगार सृजन के मामले में मध्य प्रदेश ने अग्रणी भूमिका निभाई है। इन्वेस्ट इंडिया की एमडी और सीईओ निवृत्ति राय ने इस सफलता का श्रेय 'मेक इन इंडिया' और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) जैसी क्रांतिकारी योजनाओं को दिया है। यह समग्र प्रयास न केवल भारत को एक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार भी खोल रहे हैं, जो अंततः देश को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
