
दिल्ली विधानसभा परिसर आगामी 6 मई को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संध्या का साक्षी बनने जा रहा है। लोकतंत्र के इस मंदिर में पहली बार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जीवन दर्शन की गूँज सुनाई देगी।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि सदन के प्रांगण में सुप्रसिद्ध कवि और ओजस्वी वक्ता डॉ. कुमार विश्वास द्वारा उनके लोकप्रिय कार्यक्रम 'अपने-अपने राम' की प्रस्तुति दी जाएगी। यह आयोजन न केवल विधायी परिसर के लिए नया अनुभव होगा, बल्कि यह आधुनिक राजनीति और प्राचीन भारतीय मूल्यों के समन्वय का एक अनूठा उदाहरण भी पेश करेगा।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को तैयारियों का जायजा लेते हुए बताया कि इस भव्य संगीतमय रामकथा का खाका खींच लिया गया है। कार्यक्रम में केंद्र सरकार के कई मंत्रियों, दिल्ली कैबिनेट के सदस्यों और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित किया गया है। अध्यक्ष के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मात्र कथा श्रवण नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को धर्म, सत्यनिष्ठा और कर्तव्यपरायणता जैसे उन शाश्वत मूल्यों से जोड़ना है जो भगवान राम ने अपने जीवन के माध्यम से स्थापित किए थे। यह कार्यक्रम संगीत, कविता और प्रभावशाली कथावाचन का एक ऐसा मिश्रण होगा जो युवाओं और नीति निर्माताओं दोनों को समान रूप से प्रेरित करने की क्षमता रखता है।
आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए रोहिणी से भाजपा विधायक ने कहा कि डॉ. कुमार विश्वास भगवान राम के जीवन के उन प्रसंगों को आधुनिक संदर्भों में साझा करेंगे, जो त्याग, संघर्ष और अनुकरणीय नेतृत्व को दर्शाते हैं। वर्तमान समय में जब सामाजिक और राजनीतिक जीवन में नैतिक मूल्यों की चर्चा अनिवार्य हो गई है, तब विधानसभा जैसे गौरवशाली संस्थान में ऐसी प्रस्तुति का होना समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित करेगा। विधानसभा के प्रांगण में इस भव्य आयोजन के लिए बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है और सुरक्षा के साथ-साथ बैठने की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से दिल्ली विधानसभा अपनी विधायी गतिविधियों से इतर सांस्कृतिक और नैतिक चेतना के केंद्र के रूप में उभरने का प्रयास कर रही है। 'अपने-अपने राम' के माध्यम से रामत्व की व्याख्या जब दिल्ली की सत्ता के गलियारे में होगी, तो यह निश्चित रूप से आने वाले समय के लिए एक बड़ी लकीर खींचेगा। समापन के तौर पर यह कहा जा सकता है कि यह आयोजन भारतीय लोकतंत्र की संस्थाओं में सांस्कृतिक विरासत के समावेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा, जो कर्तव्यों के प्रति समर्पण की भावना को जागृत करेगा।
