
झालावाड़ जिले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हत्या के सनसनीखेज षड्यंत्र को नाकाम कर दिया है। श्रीमान पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार ने बताया कि दिनांक 05.04.2026 को पुलिस थाना खानपुर पर सुपारी देकर हत्या करवाने के दुष्प्रेरण के मामले में परिवाद प्राप्त हुआ, जिसकी जांच श्री जितेन्द्र कुमार एएसआई से करवायी गयी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस थाना खानपुर में प्रकरण दर्ज किया गया। प्रकरण की गंभीरता व निर्दोषजन की हत्या की संभावना को मध्यनजर रखते हुए श्री भागचंद मीणा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक झालावाड के निर्देशन में व श्रीमति गरिमा जिंदल वृत्ताधिकारी वृत्त खानपुर के निकटतम सुपरविजन में प्रभारी जिला स्पेशल टीम झालावाड व थानाधिकारी पुलिस थाना खानपुर के नेतृत्व में आरोपियों की शीघ्रातिशीघ्र गिरफ्तारी हेतु विशेष टीम का गठन किया गया।
घटना का विस्तृत विवरण और आरोपी की रंजिश
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी धनराज मीणा उर्फ धन्नजी निवासी लाखाखेड़ी का दुर्गाशंकर नागर से पुराना विवाद था जिसके कारण वह दुर्गाशंकर से रंजिश रखता था। इसी रंजिश के चलते आरोपी दुर्गाशंकर की हत्या करवाना चाहता था। विशेष टीम द्वारा तत्परता व अथक प्रयासों के द्वारा समय रहते एक आम नागरिक की जान बचाने के साथ-साथ, हत्या जैसे संगीन अपराध के लिए उकसाने वाले आरोपी धनराज मीणा को गिरफ्तार करने में सफलता अर्जित की है।
हत्या का सौदा और खौफनाक योजना
आरोपी धनराज ने परिवादी को दुर्गाशंकर नागर की हत्या करने के लिए सात लाख रुपये की सुपारी का प्रस्ताव दिया। आरोपी ने न केवल हत्या के लिए उकसाया, बल्कि परिवादी को दुर्गाशंकर का घर दिखाया और उसे कुल्हाड़ी अथवा चाकू जैसे धारदार हथियारों से हमला करने की विशेष सलाह दी।
ब्लैकमेलिंग और मनोवैज्ञानिक दबाव का खेल
जांच में यह भी सामने आया कि जब परिवादी ने इस जघन्य अपराध से इनकार किया, तो आरोपी धनराज मीणा ने अपनी आपराधिक प्रवृत्ति दिखाते हुए उसे डराना शुरू कर दिया। धमकी दी गई कि यदि काम नहीं किया तो वह डेढ़ गुना वसूली करेगा। आरोपी धनराज ने परिवादी से जबरन खाली चेक ले लिए। परिवादी को भय था कि यदि उसने यह काम नहीं किया, तो आरोपी किसी भाड़े के हत्यारे से इस वारदात को अंजाम दिलवा देगा।
वैज्ञानिक एवं तकनीकी अन्वेषण से मिले साक्ष्य
जांच अधिकारी ने आधुनिक जांच तकनीकों का प्रयोग करते हुए साक्ष्य जुटाए हैं। परिवादी द्वारा पेश किए गए मोबाइल की जांच की गई, जिसमें आरोपी और परिवादी के बीच हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग्स मिली हैं। पुलिस ने इन रिकॉर्डिंग्स का वॉइस एनालिसिस और ट्रांसस्क्रिप्ट तैयार की जो अहम सबुत बना। पुलिस ने आरोपी धनराज मीणा और उसके पिता सियाराम मीणा के विरुद्ध पूर्व में दर्ज मुकदमों और दुर्गाशंकर नागर के साथ चल रही वर्षों पुरानी रंजिश के दस्तावेजी सबूत एकत्रित किए हैं, जो अपराध के मकसद को साबित करते हैं।
आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
आरोपी धनराज मीणा के पिता सियाराम मीणा व दुर्गाशंकर नागर के मध्य आपसी विवाद को लेकर पहले भी प्रकरण दर्ज है। सियाराम मीणा के विरुद्ध थाना खानपुर में प्रकरण संख्या 301/2023 व थाना कोतवाली झालावाड में प्रकरण संख्या 756/2023 दर्ज है। इसके अतिरिक्त आपसी विवाद को लेकर गत वर्ष 2025 में माह अप्रैल व अक्टुबर में भी गाली-गलौच करने व धमकी देने के परिवाद थाना खानपुर में दर्ज है।
कानून का शिकंजा और गिरफ्तारी
समस्त साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर, आरोपी धनराज मीणा द्वारा परिवादी को अपराध करने के लिए दुष्प्रेरित करने और हत्या का षड्यंत्र रचने का अपराध अन्तर्गत धारा 103(1), 55 बीएनएस पाया गया। उक्त धाराओं के अन्तर्गत 07 वर्ष तक सजा का प्रावधान है। इस पर विशेष टीम द्वारा दिनांक 06.04.2026 को आरोपी धनराज को गिरफ्तार किया गया।
"यह कार्यवाही उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो रंजिश निकालने के लिए कानून को हाथ में लेते हैं या दूसरों को अपराध के लिए उकसाते हैं। झालावाड़ पुलिस सुरक्षित समाज के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।"
झालावाड़ पुलिस: आमजन में विश्वास - अपराधियों में भय
गिरफ्तार शुदा आरोपी का विवरण
धनराज उर्फ धन्नजी पुत्र सियाराम मीणा उम्र 40 वर्ष निवासी लाखाखेडी थाना खानपुर जिला झालावाड को गिरफ्तार किया गया है।
मामले का खुलासा करने वाली पुलिस टीम
पुलिस थाना खानपुर से श्री कृष्णगोपाल आरपीएस प्रोबे. थानाधिकारी, श्री जितेन्द्र कुमार सउनि, श्री छोटुलाल हैड कानि. 898, श्री रामरतन हैड कानि. 838, श्री रघुवीर कानि. 1094 शामिल रहे। जिला स्पेशल टीम से प्रभारी जिला स्पेशल टीम मय जाप्ता श्री सुरेन्द्र हेड कानि. 322, श्री महावीर हैड कानि. 155, श्री जयकिशन कानि. 1502, श्री चंद्रशेखर कानि. 310, श्री भरतराज कानि. 1283, श्री रामलाल कानि. 1463, श्री श्यामलाल कानि. 1506, श्री अरुण कानि. 1316, श्री लेखराज कानि. 1250, व श्री नरेन्द्र कानि. चालक 54 की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
