
आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रहे मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं, जहां पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पर की गई तीखी टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच यह टकराव न केवल आंतरिक असहमति को उजागर करता है, बल्कि संसद में पार्टी की रणनीति और प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े करता है।
यह विवाद उस समय उभरा जब पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया और उनकी बोलने की भूमिका को सीमित कर दिया। इसके बाद भगवंत मान ने सार्वजनिक रूप से चड्ढा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह गंभीर राजनीतिक मुद्दों को छोड़कर "सामोसे जैसे हल्के मुद्दों" को संसद में उठा रहे हैं। मान के अनुसार, ऐसे मुद्दे पार्टी की प्राथमिकताओं और दिशा से मेल नहीं खाते।
मुख्यमंत्री मान ने आगे कहा कि जब देश में वोट कटौती (वोट चोरी) जैसे गंभीर आरोप और गुजरात में पार्टी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी जैसे मुद्दे मौजूद हैं, तब इस प्रकार के विषयों को उठाना पार्टी लाइन के खिलाफ है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चड्ढा का रुख ऐसा प्रतीत होता है मानो वह "किसी और स्टेशन से बोल रहे हों", जिससे उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े होते हैं। इसी संदर्भ में मान ने उन्हें "कम्प्रोमाइज्ड" तक कह दिया।
विवाद को और गहराई तब मिली जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने भी चड्ढा की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद के बजट सत्र के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर चड्ढा ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इस प्रस्ताव में चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ एनडीए सरकार के पक्ष में पक्षपात के आरोप लगाए गए थे।
आतिशी ने एक वीडियो संदेश में सीधे तौर पर चड्ढा से सवाल किया कि वह भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने से क्यों बच रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल और दिल्ली में कथित वोट कटौती और चुनावी अनियमितताओं का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे गंभीर मुद्दों पर चुप रहना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सौरभ भारद्वाज ने भी इसी मुद्दे को उठाते हुए चड्ढा के रुख को पार्टी की सामूहिक रणनीति से अलग बताया।
इन आरोपों के बीच राघव चड्ढा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें "चुप कराया गया है, लेकिन वह पराजित नहीं हुए हैं।" उन्होंने यह भी दावा किया कि वह संसद में हमेशा जनहित के मुद्दे उठाते रहे हैं और आगे भी ऐसा करते रहेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। यह विवाद न केवल पार्टी की एकजुटता पर असर डाल सकता है, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीतियों और संसद में उसकी भूमिका को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे समय में जब राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष की एकजुटता महत्वपूर्ण मानी जा रही है, AAP के भीतर यह खींचतान भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर कई संकेत दे रही है।
