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कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया आज देंगे इस्तीफा; राज्यपाल कार्यालय को दी सूचना

Prathakal 4 months ago

Karnataka CM Siddaramaiah resignation updates : कर्नाटक की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है।

पिछले कई दिनों से मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर जारी सस्पेंस और कयासों के दौर पर अब पूरी तरह से विराम लग चुका है। उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली बेहद पुख्ता जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज यानी 28 मई को दोपहर ठीक 3 बजे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। वह बेंगलुरु स्थित राजभवन जाकर आधिकारिक तौर पर अपना इस्तीफा सौंपेंगे। यह घटनाक्रम केवल एक चेहरे के बदलने का संकेत नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण राज्य की सत्ता संरचना और राजनीतिक भविष्य को एक नया मोड़ देने वाला ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।

इस बड़े सियासी उलटफेर के बीच आज सुबह मुख्यमंत्री आवास पर एक बेहद भावुक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच एक हाई-प्रोफाइल ब्रेकफास्ट मीटिंग आयोजित की गई थी। इस बैठक के दौरान दोनों कद्दावर नेताओं ने न केवल एक-दूसरे को गले लगाया, बल्कि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आगे बढ़कर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया। बंद कमरे में हुई इस मुलाकात और नेताओं के बीच के इस बॉडी लैंग्वेज को सत्ता के शांतिपूर्ण और सहमति आधारित हस्तांतरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसने पार्टी के भीतर किसी भी संभावित अंतर्विरोध की खबरों को फिलहाल शांत कर दिया है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में एक अप्रत्याशित मोड़ तब आया जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत के अचानक बेंगलुरु छोड़ने की खबर सामने आई। मुख्यमंत्री के संभावित इस्तीफे के ठीक पहले राज्यपाल की इस रवानगी ने राज्य की राजनीति में अटकलों और कयासबाजियों के बाजार को बेहद गर्म कर दिया है। विपक्ष जहां इसे एक संवैधानिक गतिरोध के रूप में देख रहा है, वहीं कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों ने इन तमाम अटकलों को खारिज करते हुए स्थिति स्पष्ट की है। कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि राज्यपाल की भौतिक गैर-मौजूदगी से इस पूरी संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। सिद्धारमैया गुरुवार दोपहर 3 बजे तय कार्यक्रम और तय वैधानिक प्रोटोकॉल के अनुसार ही राजभवन के वरिष्ठ अधिकारियों को अपना इस्तीफा सौंपेंगे।

संवैधानिक और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, राज्यपाल की अनुपस्थिति में भी मुख्यमंत्री का इस्तीफा राजभवन के सचिवालय द्वारा आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा सकता है, जिसे बाद में राज्यपाल की अंतिम संस्तुति के लिए भेजा जाता है। इस बड़े राजनैतिक बदलाव का प्रभाव न केवल कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के स्थायित्व पर पड़ेगा, बल्कि आगामी दिनों में नए मंत्रिमंडल के गठन और नए नेतृत्व की प्राथमिकताओं को भी तय करेगा। सिद्धारमैया का यह कदम कर्नाटक की राजनीति में एक युग के अंत और एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है, जिसके दूरगामी परिणाम आने वाले समय में पूरे देश की राजनीति पर दिखाई देंगे।

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