
भारतीय क्रिकेट में विस्फोटक बल्लेबाज़ी का नया चेहरा बन चुके अभिषेक शर्मा आज उस मुकाम पर खड़े हैं, जहां उनकी हर पारी मैच का रुख बदलने की ताकत रखती है। 2025 में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज़ बनना और 931 रेटिंग अंकों के साथ इतिहास रचना इस बात का प्रमाण है कि वह सिर्फ एक उभरते खिलाड़ी नहीं, बल्कि आधुनिक क्रिकेट के परिभाषित सितारे हैं।
इंग्लैंड के खिलाफ 54 गेंदों में 135 रन की पारी हो या एशिया कप में 314 रन बनाकर टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनना, अभिषेक ने अपने आक्रामक अंदाज़ से गेंदबाज़ों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।
अमृतसर में 4 सितंबर 2000 को जन्मे अभिषेक शर्मा का क्रिकेट सफर बेहद कम उम्र में शुरू हुआ। दिल्ली पब्लिक स्कूल, अमृतसर से पढ़ाई करने वाले अभिषेक ने जूनियर स्तर पर ही अपनी प्रतिभा के संकेत दे दिए थे। उनके बचपन के साथी Shubman Gill के साथ अंडर-14 में ओपनिंग करना और बाद में महान ऑलराउंडर Yuvraj Singh से लॉकडाउन के दौरान प्रशिक्षण लेना उनके खेल को नई दिशा देने वाला साबित हुआ। यही वजह रही कि विजय मर्चेंट ट्रॉफी में 1200 रन बनाकर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान मजबूत कर ली।
अंडर-19 स्तर पर अभिषेक का प्रभाव और भी बड़ा रहा। 2016 एशिया कप में कप्तानी करते हुए भारत को खिताब दिलाना और 2018 अंडर-19 विश्व कप विजेता टीम का अहम हिस्सा बनना उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बना। इसके बाद रणजी ट्रॉफी में 2017 में डेब्यू और 2021 में मात्र 42 गेंदों में लिस्ट-ए क्रिकेट का सबसे तेज भारतीय शतक लगाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह बड़े मंच के खिलाड़ी हैं। 2023-24 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 485 रन बनाकर पंजाब को पहला खिताब दिलाना उनके नेतृत्व और निरंतरता का उदाहरण बना।
आईपीएल में अभिषेक शर्मा का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन Sunrisers Hyderabad के साथ उन्होंने अपनी असली पहचान बनाई। 2022 में 426 रन बनाने के बाद 2024 में 484 रन और 200 के स्ट्राइक रेट के साथ उन्होंने खुद को लीग के सबसे खतरनाक ओपनरों में शामिल कर लिया। Travis Head के साथ उनकी साझेदारी ने गेंदबाज़ों की नींद उड़ा दी। 2025 में 40 गेंदों में शतक और 55 गेंदों में 141 रन की ऐतिहासिक पारी ने उन्हें आईपीएल इतिहास के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज़ों की कतार में खड़ा कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अभिषेक का आगमन भी उतना ही धमाकेदार रहा। जिम्बाब्वे दौरे पर डेब्यू के बाद ही दूसरी पारी में शतक लगाकर उन्होंने सबसे तेज भारतीय शतक का रिकॉर्ड बनाया। न्यूजीलैंड के खिलाफ 14 गेंदों में अर्धशतक और 20 गेंदों में नाबाद 68 रन की पारी उनके आक्रामक डीएनए को दर्शाती है। हालांकि 2026 टी20 विश्व कप की शुरुआत में लगातार तीन शून्य उनके करियर का कठिन दौर रहा, लेकिन फाइनल में 21 गेंदों पर 52 रन की पारी खेलकर उन्होंने साबित किया कि बड़े खिलाड़ी दबाव में ही असली चमक दिखाते हैं।
आज अभिषेक शर्मा सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की दिशा हैं। घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक, हर स्तर पर उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह सिद्ध किया है कि कड़ी मेहनत, सही मार्गदर्शन और निडर मानसिकता किसी भी खिलाड़ी को शिखर तक पहुंचा सकती है। उनका सफर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि प्रतिभा जब अवसर से मिलती है, तो इतिहास बनता है।
