
जब भी बॉलीवुड के सबसे खतरनाक और दमदार विलेन की बात होती है, तो Ashutosh Rana का नाम अपने आप सामने आ जाता है। इन दिनों फिर से वह चर्चा में हैं क्योंकि बड़े पर्दे से लेकर ओटीटी और थिएटर तक हर जगह उनका जलवा दिखाई दे रहा है।
"पठान", "टाइगर 3", "फाइटर" और आने वाली फिल्मों में उनका लगातार दिखना यह साबित करता है कि दशकों बाद भी उनका स्टारडम कम नहीं हुआ। उनकी गहरी आवाज़, आंखों का खौफ और स्क्रीन पर मौजूदगी ऐसी है कि दर्शक आज भी उन्हें देखकर सिहर उठते हैं।
मध्य प्रदेश के गाडरवारा में जन्मे आशुतोष राणा का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। बचपन अहमदाबाद में बीता और फिर उन्होंने सागर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की। शुरुआत टीवी से हुई, जहां "स्वाभिमान", "आहट", "वारिस" और "सैटरडे सस्पेंस" जैसे शोज़ ने उन्हें पहचान दिलाई। लेकिन असली धमाका तब हुआ जब 1998 में फिल्म "दुश्मन" में उन्होंने गोकुल पंडित का किरदार निभाया। उस किरदार ने हिंदी सिनेमा में विलेन की परिभाषा ही बदल दी। उनकी डरावनी हंसी और साइको किलर वाला अंदाज़ दर्शकों के दिमाग में हमेशा के लिए बस गया।
"दुश्मन" के बाद "संघर्ष" में लज्जा शंकर पांडे का किरदार निभाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक्टर नहीं, बल्कि अभिनय के मास्टर हैं। यही वजह रही कि उन्हें लगातार दो फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले और बॉलीवुड में उनकी अलग पहचान बन गई। "कलयुग", "आवारापन", "मुल्क", "धड़क", "वॉर", "पगलैट" और "भेड़" जैसी फिल्मों में उन्होंने हर बार अलग रंग दिखाया। खास बात यह है कि उन्होंने सिर्फ हिंदी नहीं बल्कि तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। आज भी बड़े निर्देशक किसी मजबूत किरदार के लिए सबसे पहले उनका नाम सोचते हैं।
फिल्मों के अलावा आशुतोष राणा ओटीटी की दुनिया में भी छाए हुए हैं। "अरन्यक", "खाकी: द बिहार चैप्टर", "द ग्रेट इंडियन मर्डर" और "मर्डर इन माहिम" जैसी सीरीज में उनके अभिनय ने नई पीढ़ी को भी उनका फैन बना दिया। "पगलैट" में दुख से टूटे पिता के रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर ओटीटी अवॉर्ड मिला, जिसने यह साबित किया कि वह सिर्फ डरावने विलेन ही नहीं बल्कि भावनात्मक किरदारों में भी जान डाल सकते हैं। टीवी हो, फिल्म हो या वेब सीरीज, हर जगह उनका अंदाज़ अलग ही दिखाई देता है।
बहुत कम लोग जानते हैं कि आशुतोष राणा सिर्फ अभिनेता ही नहीं बल्कि लेखक, कवि और सिंगर भी हैं। उनकी किताबें "मौन मुस्कान की मार" और "रामराज्य" को काफी पसंद किया गया। वह समाजसेवा से भी जुड़े रहते हैं और थिएटर की दुनिया में भी लगातार सक्रिय हैं। 2024 में उन्होंने "हमारे राम" नाटक से स्टेज पर वापसी की, जिसके 450 से ज्यादा शो हो चुके हैं। दुबई ओपेरा तक पहुंच चुका यह नाटक अब इंटरनेशनल टूर की तैयारी में है। उनकी पत्नी Renuka Shahane के साथ उनकी जोड़ी भी इंडस्ट्री की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में गिनी जाती है।
आज के दौर में जहां कई कलाकार वक्त के साथ गायब हो जाते हैं, वहीं आशुतोष राणा लगातार खुद को नए अंदाज़ में पेश कर रहे हैं। चाहे विलेन बनना हो, देशभक्त अधिकारी का रोल निभाना हो या फिर एक संवेदनशील पिता का किरदार, वह हर बार स्क्रीन पर छा जाते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर सिनेमा प्रेमियों तक हर कोई आज भी पूछ रहा है - आखिर इतने सालों बाद भी आशुतोष राणा का जादू खत्म क्यों नहीं होता?
