
आज जब भी बॉलीवुड में अलग कहानी, हटके किरदार और सोशल मैसेज वाली फिल्मों की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आयुष्मान खुराना का आता है। कभी अंधे पियानो प्लेयर बनकर लोगों को चौंका देना, कभी गंजेपन पर फिल्म करना, तो कभी समलैंगिक रिश्तों जैसे मुद्दों को मेनस्ट्रीम सिनेमा में लाना, आयुष्मान ने हमेशा वही किया जो बाकी स्टार्स करने से डरते थे।
यही वजह है कि आज उनका हर प्रोजेक्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन जाता है। "ड्रीम गर्ल 2" की सफलता और "थम्मा" जैसी हॉरर-कॉमेडी के बाद उनका करियर फिर से हाई मोड में नजर आ रहा है।
चंडीगढ़ में जन्मे आयुष्मान का असली नाम निशांत खुराना था, लेकिन बचपन में उनका नाम बदलकर आयुष्मान रख दिया गया। थिएटर, स्ट्रीट प्ले और कॉलेज फेस्ट से शुरू हुआ उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की, रेडियो जॉकी बने, फिर एमटीवी रोडीज जीतकर पहली बार लाइमलाइट में आए। एंकरिंग की दुनिया में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। "इंडियाज गॉट टैलेंट", "म्यूजिक का महामुकाबला" और आईपीएल शो होस्ट करते हुए उनकी स्मार्ट पर्सनैलिटी और नेचुरल अंदाज लोगों को खूब पसंद आया।
लेकिन असली गेम तब बदला जब उन्होंने "विक्की डोनर" से बॉलीवुड में एंट्री की। स्पर्म डोनर जैसे बोल्ड विषय पर बनी फिल्म में उनका काम इतना दमदार था कि पहली ही फिल्म से वह स्टार बन गए। "पानी दा रंग" गाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक्टर नहीं, शानदार सिंगर भी हैं। इसके बाद कुछ फिल्में नहीं चलीं, लेकिन आयुष्मान ने हार नहीं मानी। "दम लगा के हईशा" ने उनकी किस्मत पलट दी और फिर "बरेली की बर्फी", "शुभ मंगल सावधान", "बधाई हो", "ड्रीम गर्ल" और "बाला" जैसी फिल्मों ने उन्हें आम आदमी का सुपरस्टार बना दिया।
आयुष्मान की सबसे बड़ी ताकत यही रही कि उन्होंने हीरो वाली चमक से ज्यादा इंसानी कमियों वाले किरदार चुने। "अंधाधुन" में उनका ब्लाइंड पियानिस्ट वाला रोल आज भी उनके करियर का सबसे शानदार परफॉर्मेंस माना जाता है। इस फिल्म ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिलाया और दुनियाभर में जबरदस्त कमाई की। वहीं "आर्टिकल 15" में ईमानदार पुलिस ऑफिसर बनकर उन्होंने समाज में जातिवाद जैसे मुद्दे पर सीधा वार किया। उनकी फिल्मों की खास बात यह रही कि वह एंटरटेनमेंट के साथ समाज को आईना भी दिखाती हैं।
एक्टर के साथ-साथ आयुष्मान का म्यूजिक भी लोगों के दिलों में खास जगह रखता है। "मिट्टी दी खुशबू", "यहीं हूं मैं", "चन कित्थन", "मेरे लिए तुम काफी हो" और "रातां कालियां" जैसे गानों ने उन्हें एक रोमांटिक सिंगर की पहचान दी। उनकी आवाज में एक अलग सुकून और देसी फील है, जो सीधे दिल तक पहुंचती है। यही वजह है कि उनके गाने रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर वायरल होने लगते हैं। फिल्मों के अलावा वह यूनीसेफ इंडिया के नेशनल गुडविल एंबेसडर भी हैं और कई सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं।
आज आयुष्मान खुराना सिर्फ एक फिल्म स्टार नहीं, बल्कि कंटेंट ड्रिवन सिनेमा का चेहरा बन चुके हैं। उन्होंने यह साबित किया कि बिना बड़े एक्शन, बिना टिपिकल हीरोइज्म और बिना फॉर्मूला फिल्मों के भी सुपरस्टार बना जा सकता है। उनकी कहानी हर उस इंसान को इंस्पायर करती है जो भीड़ से अलग अपनी पहचान बनाना चाहता है। आने वाले समय में "पति पत्नी और वो दो" और नई स्पाई-कॉमेडी फिल्मों के साथ वह फिर बड़े पर्दे पर धमाका करने को तैयार हैं, और यही वजह है कि आज हर कोई पूछ रहा है - आखिर आयुष्मान खुराना में ऐसा क्या खास है?
