
भारतीय क्रिकेट के नए दौर में कुछ युवा खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा से तेजी से पहचान बनाई है, और उनमें Devdutt Padikkal का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया है। बाएं हाथ के इस स्टाइलिश बल्लेबाज़ ने घरेलू क्रिकेट से लेकर आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपने प्रदर्शन से यह साबित किया है कि वह भविष्य के भरोसेमंद बल्लेबाज़ों में शामिल हैं।
खासतौर पर आईपीएल में उनकी निरंतरता और तकनीकी मजबूती ने उन्हें क्रिकेट विशेषज्ञों और चयनकर्ताओं की नजरों में खास बना दिया।
7 जुलाई 2000 को केरल के एडप्पल में जन्मे पडिक्कल का क्रिकेट सफर साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होकर असाधारण उपलब्धियों तक पहुंचा। शुरुआती दिनों में उनका परिवार हैदराबाद से बेंगलुरु आ बसा, जहां उन्होंने कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिकेट में प्रशिक्षण लिया। अंडर-16 और अंडर-19 स्तर पर कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अपनी बल्लेबाज़ी का लोहा मनवाया। 2017 में कर्नाटक प्रीमियर लीग में बल्लारी टस्कर्स के लिए खेलते हुए उनके प्रदर्शन ने पहली बार उन्हें बड़े मंच की ओर अग्रसर किया।
घरेलू क्रिकेट में उनका उदय बेहद प्रभावशाली रहा। 2018-19 रणजी ट्रॉफी में पदार्पण करते हुए उन्होंने शुरुआती मैचों में ही अर्धशतक जड़कर अपनी क्षमता का संकेत दिया। इसके बाद विजय हजारे ट्रॉफी 2019-20 में 11 मैचों में 609 रन बनाकर वह टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। इस प्रदर्शन ने उन्हें भारत 'ए' टीम तक पहुंचाया और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। सीमित ओवरों के साथ-साथ उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भी 178 रन की शानदार पारी खेलकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।
आईपीएल में उनका आगमन उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। 2020 सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेलते हुए उन्होंने 15 मैचों में 473 रन बनाए और 'इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' का खिताब अपने नाम किया। अपने पहले चार मैचों में तीन अर्धशतक लगाकर उन्होंने इतिहास रच दिया। 2021 में उन्होंने 101* रन की नाबाद पारी खेलकर अपना पहला आईपीएल शतक पूरा किया। इसके बाद राजस्थान रॉयल्स और फिर लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ उनका सफर जारी रहा, हालांकि 2024 का सीजन उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, जहां वह 7 पारियों में केवल 38 रन ही बना सके।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका प्रवेश 2021 में श्रीलंका के खिलाफ टी20 मुकाबले से हुआ। इसके बाद 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट टीम में शामिल होकर उन्होंने पदार्पण मैच में 65 रन की संयमित पारी खेली, जिसमें 10 चौके और एक छक्का शामिल था। यह पारी उनके धैर्य और तकनीकी मजबूती का प्रमाण बनी। घरेलू सर्किट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के चलते उन्हें भारत 'ए' और अन्य महत्वपूर्ण सीरीज में भी मौके मिलते रहे, जहां उन्होंने 150 रन जैसी बड़ी पारियां खेलकर चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।
2025-26 का घरेलू सत्र उनके करियर का सबसे शानदार दौर साबित हुआ, जहां उन्होंने तीनों प्रारूपों में लगातार रन बनाए और कर्नाटक टीम की कप्तानी भी संभाली। उनकी अगुवाई में टीम रणजी ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंची। आईपीएल 2025 में भी उन्होंने वापसी करते हुए अहम पारियां खेलीं, हालांकि चोट के कारण सीजन बीच में छोड़ना पड़ा। बावजूद इसके, उनकी निरंतरता, तकनीक और मानसिक मजबूती उन्हें भारतीय क्रिकेट के भविष्य का एक मजबूत स्तंभ बनाती है।
