
भारतीय महिला क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों में जिन युवा खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा से नई पहचान बनाई है, उनमें Yastika Bhatia का नाम तेजी से उभरा है। बाएं हाथ की इस विकेटकीपर बल्लेबाज़ ने अपनी शांत बल्लेबाज़ी, बेहतरीन टाइमिंग और दबाव में संयमित प्रदर्शन के दम पर टीम इंडिया में खास जगह बनाई।
मैदान पर उनका आत्मविश्वास और विकेट के पीछे उनकी फुर्ती उन्हें आधुनिक महिला क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल करती है। घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक यास्तिका ने जिस तेजी से अपनी पहचान बनाई, वह उनकी मेहनत और क्रिकेट के प्रति समर्पण की कहानी बयां करती है।
1 नवंबर 2000 को गुजरात के वडोदरा में जन्मीं यास्तिका भाटिया का क्रिकेट सफर बचपन से ही शुरू हो गया था। शुरुआत में उनका झुकाव जिम्नास्टिक्स की ओर था, लेकिन पिता के प्रोत्साहन ने उन्हें क्रिकेट की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। बड़ौदा की क्रिकेट संरचना में लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने कम उम्र में ही अपनी तकनीक और विकेटकीपिंग कौशल से चयनकर्ताओं का ध्यान खींच लिया। घरेलू क्रिकेट में बड़ौदा टीम के लिए खेलते हुए उन्होंने खुद को एक आक्रामक लेकिन संतुलित बल्लेबाज़ के रूप में स्थापित किया। यही प्रदर्शन आगे चलकर उनके लिए भारतीय टीम के दरवाजे खोलने वाला साबित हुआ।
साल 2021 यास्तिका भाटिया के करियर का सबसे बड़ा मोड़ लेकर आया। फरवरी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीमित ओवरों की सीरीज के लिए उन्हें पहली बार भारतीय महिला टीम में चुना गया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। 21 सितंबर 2021 को उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना वनडे डेब्यू किया, जबकि 30 सितंबर 2021 को टेस्ट क्रिकेट और 7 अक्टूबर 2021 को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी पदार्पण कर लिया। एक ही दौरे पर तीनों प्रारूपों में डेब्यू करना इस बात का संकेत था कि टीम प्रबंधन उन्हें भविष्य की महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में देख रहा है।
यास्तिका ने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं के भरोसे को सही साबित किया। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 28 मुकाबलों में 666 रन बनाए और चार अर्धशतक जड़े। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 64 रन रहा, जबकि औसत 24.66 का रहा। विकेट के पीछे भी उन्होंने शानदार योगदान दिया और 14 कैच के साथ 10 स्टंपिंग कर अपनी उपयोगिता साबित की। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने तीन मैचों में 98 रन बनाए, जिसमें एक महत्वपूर्ण अर्धशतक भी शामिल रहा। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भले ही उनके आंकड़े बेहद बड़े न दिखें, लेकिन 19 मैचों में उन्होंने टीम को कई मौकों पर स्थिरता प्रदान की। उनकी बल्लेबाज़ी शैली में आक्रामकता और धैर्य का संतुलन उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट की नई पीढ़ी की अहम खिलाड़ी बनाता है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ-साथ फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भी यास्तिका की मांग लगातार बढ़ी। महिला प्रीमियर लीग में Mumbai Indians Women के लिए खेलते हुए उन्होंने बड़े मंच पर अपने खेल का प्रभाव छोड़ा। इससे पहले वह Velocity टीम का भी हिस्सा रह चुकी थीं। विदेशी लीगों में उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2024-25 सीजन में उन्हें Melbourne Stars से खेलने का मौका मिला। यह उपलब्धि बताती है कि उनकी प्रतिभा को अब वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिलने लगी है।
हालांकि क्रिकेट का सफर हमेशा आसान नहीं रहा। 2025 महिला विश्व कप से पहले विशाखापत्तनम में भारत के तैयारी शिविर के दौरान उनके बाएं घुटने में चोट लग गई, जिसके कारण उन्हें विश्व कप से बाहर होना पड़ा। यह उनके करियर के लिए बड़ा झटका था, लेकिन इससे पहले तक वह भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे महत्वपूर्ण युवा खिलाड़ियों में गिनी जा रही थीं। उनकी तकनीकी बल्लेबाज़ी, विकेटकीपिंग कौशल और बड़े मैचों में संयमित रवैये ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के भविष्य का अहम चेहरा बना दिया है। आज यास्तिका भाटिया सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि उस नई पीढ़ी की प्रतीक हैं जो भारतीय महिला क्रिकेट को विश्व स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का सपना देख रही है।
