
औद्योगिक नगरी कोटा के छावनी क्षेत्र में आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का अनुपम संगम देखने को मिला, जहाँ श्री मंशापूर्ण हनुमान मंदिर प्रबंध समिति द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय हनुमान जन्मोत्सव का समापन भव्य निशुल्क सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन के साथ हुआ।
इस पुनीत आयोजन में सर्वधर्म और सर्वजाति के 32 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे, जिन्हें आशीर्वाद देने स्वयं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर एवं लाडपुरा विधायक कल्पना देवी कार्यक्रम स्थल पहुंचे। जन-जन के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन ने न केवल सामाजिक एकता की मिसाल पेश की, बल्कि सामूहिक सहभागिता के एक नए प्रतिमान स्थापित किए।
सम्मेलन का उल्लास शुक्रवार तड़के से ही छावनी बाजार में दिखाई देने लगा था। मांगलिक कार्यक्रमों का शुभारंभ गोयल धर्मशाला से सामूहिक निकासी के साथ हुआ, जहाँ बैंडबाजे की मधुर धुनों पर नाचते-गाते बाराती मंशापूर्ण हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां सामूहिक तोरण और वरमाला की रस्म हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई, जिसमें हजारों की संख्या में मौजूद जनसमूह ने पुष्पवर्षा कर नवयुगलों का अभिनंदन किया। इसके पश्चात मुख्य पंडाल में पुरोहित संजय चतुर्वेदी के पौरोहित्य में विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराया गया। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश तुसिया ने जानकारी दी कि कन्यादान की परंपरा में समाज के भामाशाहों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिसमें अशोक शाक्यवाल ने सर्वाधिक 1.30 लाख रुपये की बोली लगाकर पुण्य लाभ कमाया।
विवाह के इस पावन यज्ञ में छावनी क्षेत्र के हर परिवार ने अपनी सामर्थ्य अनुसार योगदान दिया। दानदाताओं द्वारा वधुओं को आकर्षक उपहार भेंट किए गए, जिसमें नीरज श्रृंगी द्वारा सोने का मंगलसूत्र, पलंग, गद्दे, तकिया और चादर; राजकुमार जैन द्वारा वर के लिए कुर्ता-पजामा व साफा तथा भरत जैन द्वारा वधू के लिए लहंगा-चुन्नी सेट प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त उपहारों में सोने के लॉन्ग, चांदी के राम दरबार, तांबे के कलश, स्टील के बर्तन और चांदी की बिछिया जैसे आवश्यक घरेलू सामान शामिल थे। सहयोग की इस कड़ी में मंगलमुखी नैना देवी, अनिल सोनी, तेजिंदर सिंह, लक्ष्मीनारायण, प्रमिला भटनागर, सारिका पंचोली, देव कुमार शाक्यवाल, श्रीनाथ मित्तल, रामकिशोर शर्मा, विष्णु भारद्वाज, महेंद्र राजावत तथा मिलनसार समिति सहित 35 से अधिक संस्थाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णता एक विशाल भंडारे के साथ हुई, जिसमें लगभग 70 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। इस महाप्रसाद की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 32 क्विंटल आटा, 180 पीपा तेल, 10 पीपा देसी घी, 12 क्विंटल बेसन, 18 क्विंटल आलू और 13 क्विंटल शक्कर का उपयोग हुआ। विशेष बात यह रही कि भंडारे की व्यवस्थाओं में 'हर घर से एक व्यक्ति' के सिद्धांत पर स्थानीय लोगों ने स्वेच्छा से श्रमदान किया। देर शाम तक चले इस समारोह को सफल बनाने में सचिव योगेश कोटिया, उपाध्यक्ष कमल शाक्यवाल, कोषाध्यक्ष नितेश सिंह, सह कोष अध्यक्ष राहुल शाक्यवाल, गजानंद जैन, ओम जैन, चंद्रशेखर, गिरिश, तेजेन्द्र सिंह, नरेंद्र तुसिया, सुरेश, लोकेंद्र, सिमरनजीत, योगेंद्र, जसप्रीत, जितेंद्र, तरुण सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने अनवरत सेवाएं दीं। यह आयोजन न केवल 32 परिवारों की खुशियों का आधार बना, बल्कि इसने समाज में सेवा और समर्पण की एक गहरी छाप छोड़ी है
