
जयपुर में आयोजित ऐतिहासिक प्रथम क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भारत के कृषि परिदृश्य को नई दिशा देने का शंखनाद किया गया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन के उपरांत घोषणा की कि अब देश को विभिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोनों में बांटकर प्रत्येक राज्य के लिए एक विशिष्ट 'कृषि रोडमैप' तैयार किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप किसानों को 'फार्मर आईडी' से जोड़कर खाद, बीज, बीमा और मुआवजे की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी एवं लक्षित बनाया जा रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान को कृषि निर्यात का हब बनाने की दिशा में मई 2026 में 'ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट' के आयोजन की घोषणा की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहली बार राष्ट्रीय स्तर की पारंपरिक रबी-खरीफ कॉन्फ्रेंस के स्थान पर क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा शुरू की गई है। इसके तहत देश को पांच एग्रो-क्लाइमेटिक जोनों में विभाजित कर पांच रीजनल कॉन्फ्रेंस होंगी, जिनमें मिट्टी, जलवायु और जल संसाधनों के आधार पर फसल चक्र और कृषि पद्धति तय की जाएगी। इस कॉन्फ्रेंस में ICAR के वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान, FPOs, नेफेड, NCCF और विभिन्न कृषि संस्थाएं एक मंच पर शामिल हुईं। किसानों के लिए आगामी तीन महीनों में 'फार्मर आईडी' तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जो मध्य प्रदेश के सफल खाद वितरण मॉडल की तर्ज पर पूरे देश में लागू होगा। इससे कालाबाजारी पर रोक लगेगी और बटाईदार किसानों को भी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।
खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत अभूतपूर्व लक्ष्य निर्धारित किए हैं। वर्ष 2024-25 में तिलहन उत्पादन रिकॉर्ड 429.89 लाख टन तक पहुंच गया है, जबकि उत्पादकता भी बढ़कर 1412 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। आगामी समय के लिए 10,103 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ तिलहन क्षेत्र को 29 मिलियन से बढ़ाकर 33 मिलियन हेक्टेयर और कुल उत्पादन को 39.2 मिलियन मैट्रिक टन से बढ़ाकर 69.7 मिलियन मैट्रिक टन करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 800 तेल मिलों और 1076 वैल्यू चेन क्लस्टरों का जाल बिछाया जा रहा है। दलहन मिशन के अंतर्गत भी सरकार ने राज्यों को बीज उत्पादन बढ़ाने पर विशेष प्रोत्साहन देने की घोषणा की है, जिसमें तुअर के बीज उत्पादन पर 4500 रुपये प्रति क्विंटल तक की सहायता शामिल है।
दलहन उत्पादन में अग्रणी राज्यों यथा मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात को केंद्र में रखते हुए दाल मिलों का नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए मध्य प्रदेश को 344 करोड़ और राजस्थान को 312 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। श्री चौहान ने यह भी सुनिश्चित किया कि तुअर, उड़द और मसूर जैसी दालों की 100 प्रतिशत खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाएगी। "लैब टू लैंड" मॉडल को धरातल पर उतारने के लिए 16,000 वैज्ञानिक सीधे किसानों तक तकनीक पहुंचाएंगे। नकली खाद और कीटनाशक बेचने वालों के विरुद्ध 1968 के पुराने कानून में संशोधन कर कठोर दंड के प्रावधान वाला नया कानून अगले सत्र में लाने की तैयारी है। साथ ही, आलू, प्याज और टमाटर (APT) के दामों में गिरावट से किसानों को बचाने के लिए केंद्र सरकार परिवहन और भंडारण का खर्च वहन करेगी।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सम्मेलन में राजस्थान सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि राज्य सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि में 3 हजार रुपये अतिरिक्त जोड़कर इसे 9 हजार रुपये कर दिया है। उन्होंने पिछली सरकार के तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने कार्यकाल में 35,368 फार्म पौंड बनवाए और 303 करोड़ रुपये का अनुदान दिया, जो पूर्ववर्ती सरकार के शुरुआती कार्यकाल से कई गुना अधिक है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि मई में होने वाला 'ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट' प्रदेश के किसानों को वैश्विक तकनीक से जोड़ेगा। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल सहित मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा के मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने कृषि क्षेत्र के भविष्य पर गहन मंथन किया।
