
अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक ही परिवार पर मौत का साया टूट पड़ा। रेडीमेड डोसा बैटर से बना खाना खाने के बाद परिवार के चारों सदस्य अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गए, जिसमें दो मासूम बेटियों की मौत हो गई, जबकि माता-पिता जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, भव्यना प्रजापति और उनके पति विमल प्रजापति ने 1 अप्रैल 2026 को एक स्थानीय डेयरी, घनश्याम डेरी से डोसा बैटर खरीदा था। उसी दिन परिवार ने इससे डोसा बनाकर खाया और अगले दिन फिर से उसी बैटर का इस्तेमाल किया। खाना खाने के कुछ ही समय बाद परिवार के सभी सदस्यों को उल्टी, कमजोरी और अन्य गंभीर लक्षण महसूस होने लगे। शुरुआत में उन्होंने सामान्य इलाज लिया, जिससे थोड़ी राहत मिली, लेकिन जल्द ही उनकी हालत बिगड़ने लगी।
घटना ने भयावह मोड़ तब लिया जब 4 अप्रैल को करीब ढाई से तीन महीने की मासूम बच्ची राहा की घर पर ही अचानक मौत हो गई। परिवार ने उस समय पुलिस को सूचना नहीं दी और अंतिम संस्कार कर दिया। इसके अगले ही दिन, 5 अप्रैल की सुबह, तीन से चार साल की बेटी मिश्री को चक्कर आने लगे और वह अचानक गिर पड़ी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
स्थिति गंभीर होने पर माता-पिता को KD हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां दोनों की हालत नाजुक बनी हुई है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अब तक उनके बयान भी पूरी तरह दर्ज नहीं किए जा सके हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चांदखेड़ा पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस निरीक्षक जे.के. मकवाणा ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला फूड पॉइजनिंग का प्रतीत हो रहा है, हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। दोनों मृत बच्चियों का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया गया है, जबकि घर और डेयरी से खाद्य नमूने एकत्र कर Forensic Science Laboratory तथा खाद्य एवं औषधि विभाग को जांच के लिए भेजे गए हैं।
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या यही बैटर अन्य ग्राहकों को भी बेचा गया था और क्या किसी अन्य व्यक्ति में भी इसी तरह के लक्षण सामने आए हैं। दूसरी ओर, डेयरी संचालक केतन पटेल ने दावा किया है कि उनके यहां रोजाना 100 से 125 किलो बैटर की बिक्री होती है और उसी बैच का बैटर कई अन्य ग्राहकों और उनके परिचितों ने भी इस्तेमाल किया, लेकिन किसी अन्य ने कोई शिकायत नहीं की है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में कई सवाल अनुत्तरित हैं और सभी की निगाहें फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाएगा कि इस त्रासदी के पीछे असली वजह क्या थी। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं, जिसने पूरे इलाके में भय और शोक का माहौल बना दिया है।
