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क्या है 5 राज्यों के चुनाव परिणाम? बंगाल में कांटे की टक्कर और तमिलनाडु में 'थलापति' विजय का बड़ा धमाका

Prathakal 1 week ago

West Bengal Election Trends 2026 : भारत के पांच राज्यों में सत्ता का संग्राम अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए शुरुआती रुझानों ने देश की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है।

पश्चिम बंगाल से लेकर केरल और तमिलनाडु तक, सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी, इसकी तस्वीर धुंधली लेकिन बेहद दिलचस्प होती जा रही है। 9 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच हुए मतदान के बाद आज जब मतपेटियां खुलीं, तो आंकड़ों ने कई दिग्गजों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

पश्चिम बंगाल में चुनावी समर सबसे रोमांचक मोड़ पर है। राज्य की 294 सीटों के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) फिलहाल 125 सीटों पर बढ़त बनाकर बढ़त बनाए हुए है, जबकि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) 105 सीटों पर आगे चल रही है। हाई-प्रोफाइल सीटों की बात करें तो नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी ने बढ़त बनाई हुई है, वहीं भवानीपुर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आगे चल रही हैं। आसनसोल साउथ से अग्निमित्रा पॉल और सोनारपुर साउथ से रूपा गांगुली के आगे चलने से बीजेपी खेमे में उत्साह है।

दक्षिण भारत के राज्यों में भी बदलाव की बयार साफ देखी जा रही है। तमिलनाडु में इस बार सबसे बड़ा चमत्कार 'सुपरस्टार' विजय की पार्टी 'तमिलनाडु वेत्री कड़गम' (TVK) करती दिख रही है। शुरुआती रुझानों में विजय की पार्टी 74 सीटों पर आगे है, जिसने स्थापित क्षेत्रीय दलों DMK और AIADMK के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। हालांकि, कोलाथुर सीट से मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी बढ़त बनाए हुए हैं, लेकिन राज्य में एक नए राजनीतिक युग की आहट महसूस की जा रही है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अन्य राज्यों की स्थिति इस प्रकार है:

  • असम: बीजेपी ने यहां अपनी पकड़ मजबूत रखी है और 68 सीटों पर बढ़त बनाई है, जबकि कांग्रेस महज 12 सीटों पर सिमटती दिख रही है।
  • केरल: यहां सत्ता परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन 83 सीटों पर आगे है, जबकि सत्ताधारी लेफ्ट गठबंधन 52 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
  • पुडुचेरी: केंद्र शासित प्रदेश में बीजेपी 22 सीटों के साथ स्पष्ट बढ़त की ओर है, जबकि कांग्रेस केवल 6 सीटों पर आगे चल रही है।

गौरतलब है कि इन पांच राज्यों में चुनाव प्रक्रिया बेहद जटिल रही। सिर्फ पश्चिम बंगाल में दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में मतदान संपन्न हुआ, जबकि अन्य राज्यों में एक ही चरण में जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इन नतीजों का प्रभाव न केवल संबंधित राज्यों की राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति की दिशा और दशा भी तय करेगा। जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ रही है, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मौजूदा सरकारें अपनी कुर्सी बचा पाती हैं या जनता 'परिवर्तन' के पक्ष में अपना अंतिम फैसला सुनाती है।

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