
भारत के तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल बैंकिंग परिदृश्य में Airtel Payments Bank ने एक सशक्त और व्यापक उपस्थिति दर्ज की है, जहां यह करोड़ों ग्राहकों को सहज, सुरक्षित और सुलभ वित्तीय सेवाएं प्रदान कर रहा है।
लगभग 15.5 करोड़ उपयोगकर्ताओं और पांच लाख से अधिक पड़ोस आधारित बैंकिंग प्वाइंट्स के नेटवर्क के साथ यह बैंक देश के दूर-दराज़ क्षेत्रों तक डिजिटल बैंकिंग पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नई तकनीकों, मजबूत वितरण प्रणाली और मोबाइल-आधारित सेवाओं के जरिए इसने वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी है।
इस बैंक की शुरुआत उस समय हुई जब वर्ष 2015 में भारतीय रिजर्व बैंक ने पेमेंट्स बैंक स्थापित करने के लिए कुछ कंपनियों को सैद्धांतिक मंजूरी दी। इसी क्रम में 11 अप्रैल 2016 को Airtel Payments Bank को बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 22(1) के तहत लाइसेंस प्राप्त करने वाली पहली कंपनी बनने का गौरव मिला। सितंबर 2016 में इसकी औपचारिक शुरुआत हुई और नवंबर 2016 में राजस्थान में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया। जनवरी 2017 में इसे पूरे देश में लागू किया गया, जिसका उद्देश्य भारत सरकार के कैशलेस अर्थव्यवस्था के विजन को मजबूती देना था।
नई दिल्ली स्थित मुख्यालय के साथ यह बैंक शुरुआत में भारती एयरटेल और कोटक महिंद्रा बैंक के बीच 80:20 की साझेदारी पर आधारित था, लेकिन अगस्त 2021 में कोटक महिंद्रा ने अपनी हिस्सेदारी बेच दी, जिसके बाद लगभग पूरी हिस्सेदारी भारती समूह के पास आ गई। इसी वर्ष सितंबर तिमाही में बैंक ने पहली बार लाभ दर्ज किया और इसकी वार्षिक राजस्व दर 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो इसके व्यवसाय मॉडल की सफलता को दर्शाती है। वर्ष 2022 में इसे आरबीआई एक्ट, 1934 की दूसरी अनुसूची के तहत शेड्यूल्ड बैंक का दर्जा भी मिला, जिससे इसकी विश्वसनीयता और मजबूत हुई।
सेवाओं की बात करें तो Airtel Payments Bank ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं। UPI आधारित भुगतान, Airtel Money प्लेटफॉर्म, FASTag सुविधा, और 'Airtel Safe Pay' जैसी सेवाएं इसे प्रतिस्पर्धी बाजार में अलग पहचान देती हैं। इसके अलावा बीमा और पेंशन योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और अटल पेंशन योजना को भी इसने अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाया है। डिजिटल गोल्ड निवेश के लिए 'DigiGold' और RuPay आधारित स्मार्टवॉच जैसी पहलें इसके नवाचार की दिशा को स्पष्ट करती हैं।
हालांकि, अपने विकास के दौरान बैंक को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। वर्ष 2017 में आधार आधारित ई-केवाईसी से जुड़ी शिकायतों के चलते UIDAI ने इसकी सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाई थी और 2018 में आरबीआई ने इस पर जुर्माना भी लगाया। लेकिन नियामकीय सुधारों और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाकर बैंक ने जल्द ही अपनी सेवाएं फिर से शुरू कीं और ग्राहकों का भरोसा दोबारा हासिल किया।
आज Airtel Payments Bank केवल एक बैंक नहीं, बल्कि डिजिटल वित्तीय सेवाओं का एक सशक्त प्लेटफॉर्म बन चुका है, जिसने तकनीक, पहुंच और नवाचार के माध्यम से अपनी विश्वसनीय पहचान स्थापित की है। ग्रामीण और शहरी भारत के बीच वित्तीय अंतर को कम करने में इसकी भूमिका इसे भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनाती है।
