
नीति आयोग आज भारत के आर्थिक और रणनीतिक परिदृश्य में एक ऐसे मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है, जिसका उद्देश्य केवल नीतियां बनाना नहीं, बल्कि राष्ट्र के विकास को एक नई गति और दिशा प्रदान करना है।
भारत सरकार के शीर्ष सार्वजनिक नीति थिंक टैंक के रूप में कार्यरत यह संस्थान आर्थिक विकास को उत्प्रेरित करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में जाना जाता है। इसकी महत्ता इस बात से समझी जा सकती है कि यह राज्यों को केवल प्राप्तकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार के रूप में देखता है। विकास के 'नीचे से ऊपर' (बॉटम-अप) दृष्टिकोण को अपनाकर, नीति आयोग यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक योजनाएं जमीनी हकीकत और क्षेत्रीय विविधताओं के अनुरूप हों, जिससे भारत एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर सके।
इस संस्थान की उत्पत्ति भारत की बदलती आर्थिक आवश्यकताओं का परिणाम थी। 1 जनवरी 2015 को एनडीए सरकार ने एक ऐतिहासिक कैबिनेट प्रस्ताव के माध्यम से 65 वर्ष पुराने योजना आयोग को समाप्त कर नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) की स्थापना की। पूर्ववर्ती योजना आयोग का 'ऊपर से नीचे' (टॉप-डाउन) मॉडल और 'एक आकार सभी के लिए फिट' (वन साइज फिट्स ऑल) का दृष्टिकोण समकालीन भारत की विविधताओं के लिए अप्रासंगिक हो गया था। तत्कालीन वित्त मंत्री ने भी इस बदलाव को अनिवार्य बताया था, क्योंकि एक कमान अर्थव्यवस्था के दौर का ढांचा वैश्विक प्रतिस्पर्धी युग में प्रभावी नहीं रह गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 8 फरवरी 2015 को इसकी पहली बैठक हुई, जिसने देश के शासन तंत्र में एक नए युग का सूत्रपात किया।
नीति आयोग का संगठनात्मक ढांचा इसकी शक्ति और समावेशिता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं, जबकि इसकी शासी परिषद में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री तथा केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं। यह परिषद राज्यों के बीच सहयोग और संवाद का एक जीवंत मंच प्रदान करती है। आयोग में एक उपाध्यक्ष, चार पूर्णकालिक सदस्य, चार पदेन केंद्रीय मंत्री और प्रमुख विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों से चुने गए अंशकालिक सदस्य होते हैं। साथ ही, एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इसके प्रशासनिक कार्यों का संचालन करते हैं। यह विविधतापूर्ण टीम सुनिश्चित करती है कि आयोग के पास विज्ञान, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य और अर्थशास्त्र जैसे विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता उपलब्ध हो।
अपने नवाचारों के माध्यम से नीति आयोग ने शासन में आधुनिक तकनीक के समावेश को प्राथमिकता दी है। 'इंडिया चेन' जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के जरिए आयोग ई-गवर्नेंस में ब्लॉकचेन तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है, ताकि अनुबंधों को शीघ्र लागू किया जा सके और सब्सिडी के वितरण में धोखाधड़ी को रोका जा सके। इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और बिग डेटा को भारत की डिजिटल बुनियादी संरचना 'इंडिया स्टैक' से जोड़कर पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। आयोग ने राज्य सांख्यिकी हैंडबुक विकसित कर डेटा केfragmentation को समाप्त किया है, जिससे नीति निर्माताओं को एक ही स्थान पर महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध हो सकें। इसके अतिरिक्त, 'नीति लेक्चर्स' जैसी पहल के माध्यम से वैश्विक विशेषज्ञों के अनुभव को भारतीय प्रशासन के साथ साझा किया जा रहा है।
क्षेत्रीय विकास और सामाजिक बदलाव के मोर्चे पर भी आयोग की सक्रियता उल्लेखनीय है। अटल इनोवेशन मिशन के तहत 'स्टूडेंट एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम' के माध्यम से स्कूली छात्रों के नवाचारों को बाजार तक पहुँचाया जा रहा है, तो वहीं 'मिशन लाइफ' (Lifestyle for Environment) के जरिए पर्यावरण के अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा दिया जा रहा है। आयोग ने स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में 'पोषण ज्ञान' जैसा डिजिटल भंडार विकसित किया है और जल जीवन मिशन के तहत व्यवहार परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण रणनीतियां तैयार की हैं। हालाँकि, ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के औद्योगिक विकास जैसी कुछ योजनाओं को पर्यावरणीय और स्वदेशी समुदायों के हितों के संदर्भ में चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। इन सबके बावजूद, नीति आयोग आज एक ऐसे मंच के रूप में स्थापित है जो भविष्य के भारत की चुनौतियों और अवसरों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रहा है।
