लखनऊ के क्रिश्चयन कॉलेज में भारतीय शिक्षा बोर्ड के प्रांतीय कार्यालय का उद्घाटन करते माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, योगगुरु स्वामी रामदेव और चेयरमैन एन.पी. सिंह।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के क्रिश्चयन कॉलेज परिसर में 'भारतीय शिक्षा बोर्ड' के प्रांतीय कार्यालय का ऐतिहासिक उद्घाटन संपन्न हुआ, जिसने देश की शिक्षा व्यवस्था में एक नए युग की आहट दे दी है।
इस गरिमामयी समारोह का शुभारंभ प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी, योगगुरु स्वामी रामदेव और बोर्ड के चेयरमैन एन.पी. सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। यह आयोजन न केवल एक कार्यालय का उद्घाटन था, बल्कि आधुनिकता और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के संगम की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

समारोह को संबोधित करते हुए स्वामी रामदेव ने शिक्षा जगत में आमूलचूल परिवर्तन का आह्वान किया। उन्होंने कड़े शब्दों में उद्घोष किया कि जिस प्रकार योग क्रांति ने वैश्विक पटल पर भारत की पहचान बदली, ठीक वैसे ही अब लखनऊ की धरा से 'शिक्षा क्रांति' का शंखनाद हो रहा है। उन्होंने कहा, "हम मैकाले के पाप को मिटाकर दम लेंगे। भारतीय शिक्षा बोर्ड से शिक्षित होने वाला कोई भी बालक आतंकवादी, हिंसक या व्यभिचारी नहीं बनेगा।" स्वामी रामदेव ने युवा पीढ़ी में बढ़ते डिजिटल एडिक्शन और नशामुक्त आदतों की आवश्यकता पर बल देते हुए स्पष्ट किया कि इस बोर्ड का मूल उद्देश्य चरित्रवान नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने आगामी लक्ष्य साझा करते हुए बताया कि इस वर्ष देशभर के एक लाख स्कूलों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से जोड़ने की योजना है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मंत्री गुलाब देवी ने पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अंग्रेजी स्कूलों की दिशाहीन शिक्षा के कारण बच्चे अपने मूल संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने बोर्ड को पूर्ण राजकीय संरक्षण का आश्वासन देते हुए कहा कि जहाँ स्वामी रामदेव जैसे संत का संकल्प जुड़ा हो, वह कार्य निश्चित ही विश्वव्यापी स्वरूप धारण करेगा। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि यदि शिक्षा विभाग या शासन स्तर पर इस मिशन में कोई भी बाधा उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार भारतीय शिक्षा बोर्ड को अपना पूर्ण और सक्रिय सहयोग प्रदान करेगी।
विशिष्ट अतिथि एवं बोर्ड के चेयरमैन एन.पी. सिंह ने बोर्ड की समावेशी विचारधारा को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड किसी विशेष धर्म या पंथ का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि यह 150 करोड़ भारतीयों की साझा विरासत का प्रतीक है। इसका प्राथमिक ध्येय भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैश्विक शिक्षा पद्धतियों के साथ एकीकृत करना है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर डॉ. महेंद्र सिंह और प्रख्यात शिक्षक अवध ओझा ने भी अपने प्रखर विचार साझा किए। कार्यक्रम में आचार्य स्वदेश, साध्वी देवप्रिया सहित शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र के कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिन्होंने इस नई शिक्षा पद्धति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

