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मुंबई में मानसून जलभराव से निपटने के लिए बीएमसी की नई आईओटी तकनीक

मुंबई में मानसून जलभराव से निपटने के लिए बीएमसी की नई आईओटी तकनीक

Prathakal 1 week ago

मुंबई बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे (दाएं से पहली) आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष में पोर्टेबल पंपों की आईओटी आधारित निगरानी प्रणाली का निरीक्षण करती हुईं।

मुंबई। मानसून के दौरान मुंबई के निचले इलाकों में होने वाले जलभराव की विकराल समस्या से स्थायी निजात पाने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने इस बार अत्याधुनिक तकनीक का कवच तैयार किया है।

बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे ने घोषणा की है कि शहर के विभिन्न हिस्सों से बारिश के पानी की तेजी से निकासी सुनिश्चित करने के लिए कुल 547 पोर्टेबल पंप तैनात किए गए हैं। इन पंपों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पहली बार आधुनिक 'आईओटी (IoT) आधारित निगरानी प्रणाली' विकसित की गई है। इस तकनीक के तहत प्रत्येक पंप पर एक आईओटी डिवाइस लगाया गया है, जो सीधे मुख्यालय के सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड से जुड़ा रहेगा।

आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष में इस डैशबोर्ड का निरीक्षण करते हुए कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि इस डिजिटल प्रणाली से अब वरिष्ठ अधिकारी और इंजीनियर घर बैठे ही रियल-टाइम में यह निगरानी कर सकेंगे कि कौन सा पंप किस स्थान पर सक्रिय है, उसने कितने समय तक कार्य किया और कुल कितनी मात्रा में पानी की निकासी की। बीएमसी की रणनीति के अनुसार, शहर में 146, पूर्वी उपनगरों में 178 और पश्चिमी उपनगरों में 223 पंपों को अत्यंत संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है। ये पंप रेलवे सबवे, प्रमुख चौराहों और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में चौबीसों घंटे तीन पालियों (शिफ्टों) में अपनी सेवाएं देंगे।

प्रशासनिक लापरवाही और धांधली पर पूर्ण अंकुश लगाने के लिए सभी पंप ऑपरेटरों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए हैं, जिनकी जियो-फेंसिंग की जाएगी और एक मोबाइल ऐप के माध्यम से उनकी उपस्थिति दर्ज की जाएगी। साथ ही, ऑपरेटरों को जलभराव वाले स्थानों की वास्तविक तस्वीरें तुरंत नियंत्रण कक्ष में प्रेषित करना अनिवार्य होगा। आईओटी सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यदि किसी भी पंप में कोई संभावित तकनीकी खराबी उत्पन्न होने वाली होगी, तो यह सेंसर के माध्यम से मुख्यालय को पहले ही अलर्ट भेज देगा, जिससे समय रहते मरम्मत कार्य संपन्न किया जा सके। कमिश्नर अश्विनी भिडे ने निर्देशित किया है कि इस मुख्य डैशबोर्ड को वार्ड स्तर के नियंत्रण कक्षों से भी एकीकृत किया जाए, ताकि स्थानीय अधिकारी त्वरित निर्णय ले सकें और भारी बारिश के दौरान मुंबईकरों को जलभराव की समस्या से बड़ी राहत मिल सके।

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