
पुणे, अप्रैल 2026: पुणे स्थित क्लीनटेक स्टार्टअप नोवॉर्बिस इटस प्राइवेट लिमिटेड ने सीड फंडिंग राउंड में ₹13.35 करोड़ जुटाए हैं। इस निवेश राउंड का नेतृत्व ज़ेरोधा की निवेश पहल रेनमैटर ने किया, जबकि मैन्युफैक्चरिंग और टिकाऊ कारोबारों पर फोकस करने वाले शुरुआती चरण के फंड रॉकस्टड कैपिटल ने भी इसमें भागीदारी की।
इस लेनदेन पर सलाह इंडोरिएंट फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने दी।
कंपनी डीज़ल जनरेटर (डीजी) सेट्स और श्मशान घाटों जैसे विभिन्न स्रोतों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और हवा को साफ करने वाले समाधान विकसित करती है। इसके उत्पादों में मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रेट्रोफिट समाधान भी शामिल हैं, जिससे बिना मशीन बदले उत्सर्जन नियंत्रण संभव होता है।
नई पूंजी का उपयोग कंपनी अपने मौजूदा समाधानों को बड़े स्तर पर लागू करने, प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के विस्तार और बॉयलर व स्टील प्लांट्स जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने वाले नए समाधान विकसित करने में करेगी। साथ ही, यह उद्योगों को अपने परिसर में ही कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी अपनाने में सहायता देगी।
नोवॉर्बिस इटस की स्थापना हर्ष नीखरा, गगन त्रिपाठी और दिव्यांक गुप्ता ने की थी। कंपनी का पहला प्रोडक्ट फिल्टर-लेस रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (आरईसीडी) था, जिसे मौजूदा डीज़ल जनरेटर सेट्स में लगाया जा सकता है और इससे कंपनियां मशीन बदले बिना ही उत्सर्जन मानकों का पालन कर सकती हैं। इसके बाद कंपनी ने श्मशान घाटों के लिए क्रेमेटोरियम एयर प्यूरिफिकेशन सिस्टम (कैप्स) नामक उत्पाद लॉन्च किया।
सीईओ हर्ष ने कहा कि उन्होंने इंदौर में कॉलेज के दूसरे वर्ष के छात्र रहते हुए इस कंपनी की शुरुआत इस उद्देश्य से की थी कि प्रदूषण को उसकी जड़ से कम किया जाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में इस सोच को व्यावहारिक समाधानों में बदला गया है, जिनका उपयोग आज भारत में औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में हो रहा है। इस निवेश के साथ कंपनी अपनी तकनीक को बड़े स्तर पर पहुंचाने, उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार करने और उन क्षेत्रों में तेजी से अपनाव बढ़ाने पर केंद्रित है, जहां अब तक उत्सर्जन नियंत्रण पर सीमित कार्य हुआ है।
रेनमैटर में क्लाइमेट और डीप-टेक के इन्वेस्टमेंट लीड अभिनव नेगी ने कहा कि रेनमैटर ऐसे मुद्दों पर निवेश करता है जो गंभीर हैं, स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं और जिन पर अब तक पर्याप्त काम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि डीज़ल जनरेटर सेट्स से होने वाला उत्सर्जन और श्मशान घाटों से निकलने वाला प्रदूषण ऐसे ही मुद्दे हैं। उनके अनुसार, नोवॉर्बिस भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीक विकसित कर इन समस्याओं का समाधान कर रही है, जहां वैश्विक समाधान अपेक्षाकृत कम प्रभावी रहे हैं। उन्होंने कंपनी की टीम पर भरोसा जताते हुए कहा कि हर्ष नीखरा, गगन त्रिपाठी और दिव्यांक गुप्ता ने कॉलेज के दिनों में इसकी शुरुआत की और हार्डवेयर बिजनेस की चुनौतियों के बावजूद निरंतर प्रगति की। यही निरंतर प्रयास, जमीनी स्तर पर सफल उपयोग और सख्त होते नियम-कायदों का समर्थन इस निवेश के पीछे प्रमुख कारण हैं।
रॉकस्टड कैपिटल के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि उनकी फर्म उन मैन्युफैक्चरिंग आधारित कंपनियों में निवेश करती है जो बड़े स्तर पर वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि नोवॉर्बिस उत्सर्जन नियंत्रण के क्षेत्र में प्रमाणित और व्यावसायिक रूप से उपयोगी समाधान विकसित करने के कारण अलग पहचान रखती है। यह ऐसा क्षेत्र है जहां अब तक पर्याप्त कार्य नहीं हुआ, लेकिन इसकी आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्सर्जन नियमों के सख्त होने और निगरानी बढ़ने के साथ आरईसीडी जैसे रेट्रोफिट समाधान आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में उभर रहे हैं और कंपनी औद्योगिक तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़े स्तर पर विस्तार की मजबूत स्थिति में है।
इस निवेश के साथ नोवॉर्बिस इटस उत्सर्जन नियंत्रण तकनीकों के व्यापक प्रसार की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के प्रयासों को गति देगा।
