
कोटा, 4 जुलाई। राजस्थान सरकार ने कृषि सुधारों को नई दिशा देने के साथ किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कृषि आयुक्त (एग्रीकल्चर कमिश्नर) नरेश गोयल ने मीडिया से बातचीत में कृषि विभाग की नई प्राथमिकताओं, फसल बीमा नीति में किए गए बदलावों और जैविक खेती को बढ़ावा देने की योजनाओं की जानकारी दी।
कृषि आयुक्त नरेश गोयल ने कहा कि राज्य सरकार राजस्थान को जैविक कृषि का मॉडल राज्य बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके लिए कृषि विभाग अब सूचनाओं के त्वरित प्रसार में आधुनिक तकनीक का उपयोग करेगा। उन्होंने बताया कि विभाग ने प्रत्येक जिले के कृषि अधिकारियों को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि कृषि विभाग की योजनाएं और आवश्यक जानकारियां किसानों तक तेजी से पहुंचाई जा सकें। इसके साथ ही प्रचार-प्रसार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि किसानों को जैविक उत्पादों की प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और सर्टिफिकेशन से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। नरेश गोयल ने कहा कि जब किसानों को जैविक सर्टिफिकेट घर बैठे मिलने लगेंगे, तब इस क्षेत्र में बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि ऑर्गेनिक उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए किसानों को उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
फसल बीमा नीति में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी देते हुए कृषि आयुक्त ने कहा कि नई नीति के तहत प्रीमियम राशि में भारी कटौती की गई है। उन्होंने बीमा कंपनियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि वर्ष 2018 से लंबित फसल बीमा की राशि किसानों को ब्याज सहित दिलाई जाएगी। नई बीमा पॉलिसी के अनुसार यदि बीमा कंपनियां निर्धारित समय पर सर्वे नहीं करेंगी तो उन पर भारी पेनल्टी लगाई जाएगी।
नरेश गोयल ने बताया कि कई डिफॉल्टर बीमा कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया चल रही है। जो कंपनियां पुराने भुगतान जमा नहीं कराएंगी, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक जिले में बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है, ताकि किसानों की शिकायतों और दावों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
रासायनिक खादों के उपयोग पर नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कृषि आयुक्त ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकारी अभियानों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जैविक खेती पर हो रहे कृषि अनुसंधान को वैज्ञानिक तथ्यों के साथ सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाए।
अपने संबोधन के अंत में नरेश गोयल ने 'खेत बचाओ अभियान' की समीक्षा की और उपस्थित अधिकारियों तथा किसानों को जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शी बीमा व्यवस्था और जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के इन प्रयासों से कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
