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राजस्थान पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी आंदोलन: 16 हजार कर्मियों ने दी जल समाधि की चेतावनी

Prathakal 2 weeks ago

जयपुर। राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा बरसों से अपनाए जा रहे कथित पक्षपातपूर्ण रवैये और मौलिक अधिकारों से जुड़ी मांगों को ठंडे बस्ते में डाले जाने से खिन्न करीब 16,000 मंत्रालयिक कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का बिगुल फूंक दिया है।

पंचायती राज संस्थाओं के मंत्रालयिक संगठन ने माननीय मुख्यमंत्री महोदय, राजस्थान सरकार, जयपुर; माननीय मंत्री महोदय, पंचायती राज विभाग; माननीय शासन सचिव एवं आयुक्त महोदय, पंचायती राज विभाग, राजस्थान, जयपुर; माननीय मंत्री महोदय, ग्रामीण विकास विभाग; माननीय मुख्य सचिव महोदय, राजस्थान सरकार, जयपुर तथा माननीय शासन सचिव महोदय, ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन और अंतिम चेतावनी नोटिस प्रेषित कर अपने उग्र आगामी आंदोलन की रूपरेखा से अवगत कराया है। कर्मचारियों का आरोप है कि विगत दो वर्षों से कनिष्ठ लिपिक भर्ती 2013 की जांच के नाम पर उनके नैसर्गिक न्याय की मांगों को लंबित रखा जा रहा है, जो किसी भी संवर्ग के इतिहास में अभूतपूर्व है। संगठन ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एक ही भर्ती को अलग-अलग स्तर पर जांच करवाना, मुख्य जांच अधिकारी को मंत्रालयिक कर्मचारियों के मामलों से पृथक रखने की सांगठनिक मांग को दरकिनार करना और गलत तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करवाना साफ तौर पर प्रशासनिक और सांगठनिक मिलीभगत का साक्ष्य है। शासन किसी संवर्ग विशेष के प्रभाव में आकर मंत्रालयिक कर्मचारियों के हितों को लगातार कुचल रहा है, जिसके साक्ष्य संगठन समय-समय पर विभाग के समक्ष प्रस्तुत करता रहा है।

मंत्रालयिक संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जांचों के नाम पर उनकी मांगों को अब और दरकिनार नहीं किया जाए और संलग्न 'परिशिष्ट-1' के मांगपत्र पर तत्काल धरातलीय कार्यवाही की जावे। विभाग की इस बेरुखी के विरोध में संगठन ने 'स्वाभिमान बचाओ आंदोलन-ध्यानाकर्षण से जल समाधि तक' के नाम से एक बेहद विस्तृत और चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इस आंदोलन की शुरुआत 25 मई सोमवार 2026 को हुई, जब प्रदेश कार्य समिति के मुख्यालय पर उपलब्ध पदाधिकारियों ने माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय, माननीय मंत्री पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास, राज्यमंत्री ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, मुख्य सचिव महोदय, अतिरिक्त सचिव तथा शासन सचिव एवं आयुक्त पंचायती राज व ग्रामीण विकास विभाग के समक्ष ज्ञापन मय मांगपत्र प्रस्तुत कर तत्काल निर्णय लेने का आग्रह पत्र सौंपा। इसके साथ ही समस्त जिलाध्यक्षों, महामंत्रियों, ब्लॉक अध्यक्षों और महामंत्रियों को सूचित कर धरातल के प्रत्येक कर्मचारी तक पहुंच सुनिश्चित करने और पर्याप्त मीडिया कवरेज कराने का निर्देश दिया गया। इसके बाद 26 मई से 30 मई 2026 तक कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए जिलाध्यक्षों, महामंत्रियों व प्रदेश कमेटी सदस्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए गहन विचार-विमर्श किया गया। आंदोलन के अगले चरण में 01 जून 2026 सोमवार को राज्यभर के ब्लॉक मुख्यालयों पर उपखंड अधिकारियों के माध्यम से सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया गया, जबकि 07 जून 2026 सोमवार को जिला स्तर पर जिला कलेक्टर्स के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन देने की कार्यवाही जिला कार्यकारिणियों द्वारा ब्लॉक अध्यक्षों व ब्लॉक महामंत्रियों के सहयोग से की जाएगी, जिसमें कर्मचारियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।

इसके बाद आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा, जिसके तहत 10 जून 2026 बुधवार से 16 जून 2026 तक राज्यभर में एक साथ संपूर्ण आधे दिन के लिए कार्य बहिष्कार रखते हुए 'पेन डाउन' (कलम डाउन) हड़ताल की जाएगी, जिसमें पंचायती राज संस्थाओं के तीनों स्तरों के कर्मचारी हिस्सा लेंगे। तत्पश्चात 17 जून 2026 बुधवार से 19 जून 2026 तक ब्लॉक, जिला एवं प्रदेश स्तर पर सद्बुद्धि यज्ञ तथा अन्य विरोध गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 24 जून 2026 बुधवार को समस्त प्रदेश पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष व महामंत्री जयपुर के लिए कूच करेंगे, वहीं 25 जून 2026 गुरुवार को प्रातः 10 बजे से समस्त ब्लॉक अध्यक्ष और महामंत्री अपनी कमेटियों के साथ जयपुर कूच करेंगे। इस दौरान जयपुर सहित समस्त संभाग व जिला मुख्यालयों पर पहुंचने वाले माननीय मंत्रियों तथा अधिकतम विधायकों का घेराव स्थानीय उपलब्धता के आधार पर जिलाध्यक्षों, महामंत्रियों और प्रदेश कार्य समिति सदस्यों द्वारा किया जाएगा। इसके बाद 01 जुलाई 2026 बुधवार से 'दीबी जी राम जी' का संपूर्ण बहिष्कार अनिश्चितकाल के लिए प्रारंभ किया जाएगा। आंदोलन के चरम पर 06 जुलाई 2026 सोमवार को पंचायती राज संस्थाओं के समस्त मंत्रालयिक कर्मचारी जयपुर में माननीय मुख्यमंत्री महोदय का महाघेराव करेंगे। यदि फिर भी समुचित कार्यवाही नहीं हुई, तो अंतिम कदम के रूप में 07 जुलाई 2026 मंगलवार को जल महल तक पदयात्रा की जाएगी, जहां प्रेस ब्रीफिंग कर संवर्ग विशेष द्वारा सांगठनिक भ्रष्टाचार से अर्जित अकूत राशि के दम पर मंत्रालयिक संवर्ग के खिलाफ माहौल बनाने और दमनात्मक कार्यवाहियों से जुड़े समस्त दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे। इसके बाद मुख्य प्रदेश पदाधिकारियों के नेतृत्व में सभी जिलाध्यक्ष और महामंत्री सामूहिक जल समाधि लेंगे।

कर्मचारियों ने आंदोलन के नोटिस के साथ अपना 8 सूत्रीय मुख्य मांगपत्र भी सौंपा है, जिसमें पहली मांग है कि ग्राम पंचायतों में कार्यरत कनिष्ठ व वरिष्ठ सहायक का जॉब-चार्ट ग्राम विकास अधिकारी (पूर्व नाम ग्राम सेवक) या वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के समान अधिकारों सहित जारी किया जावे। पंचायतों के लेखों में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने हेतु सिंगल ओटोपी (OTP) की व्यवस्था को तुरंत समाप्त किया जावे तथा वित्त विभाग के परिपत्र दिनांक 22.07.2025 (परिशिष्ट-2) के अनुसार लेखों में मेकर, चेकर एवं अप्रूवर की व्यवस्था आवश्यक रूप से की जावे। दूसरी मांग के तहत, ग्राम पंचायतों में ग्राम सेवक का पदनाम जिस प्रकार उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर ग्राम विकास अधिकारी किया गया है, उसी व्यवस्था के तहत मंत्रालयिक संवर्ग के पद के लिए पूर्ण उत्तराखंड पैटर्न लागू करने का निर्णय कराया जावे। तीसरी मांग में वित्त विभाग के नवीनतम निर्देशों (परिशिष्ट-1) के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में मंत्रालयिक संवर्ग का कैडर पुनर्गठन कर कैडर के 56.01 प्रतिशत पदोन्नति के पदों की व्यवस्था करने को कहा गया है। चौथी मांग अंतरजिला स्थानांतरण को लेकर है, जिसमें कहा गया है कि विभाग द्वारा पूर्व में जारी स्थानांतरण पॉलिसी दिनांक 21.07.2023 से एक भी स्थानांतरण संभव नहीं है, अतः नवीन ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों में सृजित पदों पर प्रशासनिक दृष्टि से एकबारगी शिथिलन देकर सभी इच्छुक कार्मिकों के अंतरजिला स्थानांतरण की व्यवस्था की जावे।

पांचवीं मांग के अंतर्गत मंत्रालयिक कर्मचारियों के नोशनल लाभ के संबंध में माननीय न्यायालय के आदेशों की पालना सुनिश्चित करते हुए सभी कर्मचारियों के लिए एक समान निर्णय कर नोशनल परिलाभ देने की मांग की गई है। छठी मांग में मंत्रालयिक संवर्ग के एंट्री स्केल पद यानी कनिष्ठ सहायक की शैक्षणिक योग्यता राजस्थान विधानसभा की तर्ज पर स्नातक करने तथा स्टेट पेरिटी के आधार पर ग्रेड पे 3600 करने की मांग की गई है; साथ ही प्रथम एसीपी (ACP) पर समकक्ष कार्मिकों से पिछड़ रहे मंत्रालयिक संवर्ग की स्टेट पेरिटी मेंटेन करते हुए प्रथम पदोन्नति पद की ग्रेड पे 3600 निर्धारित करने का आग्रह है। सातवीं मांग के अनुसार समान संवर्ग के कार्मिकों की भांति हार्ड ड्यूटी अलाउंस एवं अतिरिक्त प्रभार भत्ता स्वीकृत किया जावे, अन्यथा मंत्रालयिक संवर्ग के कार्मिकों से फील्ड ड्यूटी नहीं लेने के आदेश जारी हों। साथ ही, ग्राम पंचायतों में पदस्थापित कनिष्ठ सहायक को अन्य पंचायत में कनिष्ठ सहायक का अतिरिक्त कार्यभार देने की विभागीय निर्देशों के विपरीत चल रही व्यवस्था को बंद किया जावे। आठवीं और अंतिम मांग में मंत्रालयिक संवर्ग से ग्रामीण विकास राज्य सेवा (आर.आर.डी.एस.) में पदोन्नति के लाभ हेतु ग्रामीण विकास अधीनस्थ सेवा के स्वीकृत पदों में से 50 प्रतिशत पद मंत्रालयिक संवर्ग से पदोन्नति हेतु आरक्षित करने की मांग की गई है। कर्मचारियों के इस आर-पार के ऐलान ने राजस्थान के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

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