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रायबरेली में निजी स्कूल प्रबंधकों की मांग तेज, प्राइवेट शिक्षकों को भी मिले कैशलेस स्वास्थ्य योजना का लाभ

रायबरेली में निजी स्कूल प्रबंधकों की मांग तेज, प्राइवेट शिक्षकों को भी मिले कैशलेस स्वास्थ्य योजना का लाभ

Prathakal 1 week ago

स्वीर में रायबरेली में निजी विद्यालयों के प्रबंधक और प्रतिनिधि हाथ में ज्ञापन पत्र की प्रतियां लेकर खड़े हैं।

तस्वीर में रायबरेली में निजी विद्यालयों के प्रबंधक और प्रतिनिधि हाथ में ज्ञापन पत्र की प्रतियां लेकर खड़े हैं।

रायबरेली में निजी विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मुख्यमंत्री की कैशलेस स्वास्थ्य योजना का लाभ दिलाने की मांग तेज हो गई है। गैर-सरकारी विद्यालय प्रबंधकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर प्राइवेट शिक्षकों को भी इस योजना में शामिल किए जाने की मांग की।

एसजेएस स्कूल के प्रबंधक रमेश बहादुर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने जिस प्रकार शासकीय शिक्षकों और अधिवक्ताओं को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई है, उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश के निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को भी यह सुविधा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकारी शिक्षकों की तुलना में करीब 10 गुना अधिक शिक्षक निजी विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और बड़े स्तर पर रोजगार सृजन में योगदान दे रहे हैं।

रमेश बहादुर सिंह ने कहा कि ईपीएफ और ईएसआई से आच्छादित होने के बावजूद निजी विद्यालयों के शिक्षकों को किसी सरकारी स्वास्थ्य योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि जहां सरकारी शिक्षकों का वेतन लाख से डेढ़ लाख रुपये तक होता है, वहीं निजी विद्यालयों के अधिकांश शिक्षक 15 से 25 हजार रुपये के सीमित वेतन पर कार्य कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में गंभीर बीमारी के दौरान कैशलेस चिकित्सा सुविधा उनके लिए बड़ा सहारा साबित हो सकती है।

न्यू स्टैंडर्ड पब्लिक स्कूल के प्रबंधक शशिकांत शर्मा ने कहा कि दिन-रात मेहनत कर शिक्षा का अलख जगाने वाले निजी विद्यालयों के शिक्षकों का बड़ा वर्ग इस योजना से पूरी तरह वंचित है। उन्होंने कहा कि जब यह वर्ग ईपीएफ और ईएसआई जैसी व्यवस्थाओं के तहत पंजीकृत है, तब उन्हें मुख्यमंत्री कैशलेस स्वास्थ्य योजना से बाहर रखना न्यायसंगत नहीं है।

शशिकांत शर्मा ने मुख्यमंत्री से जनहित और शिक्षकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए योजना के नियमों में संशोधन कर निजी विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इसमें शामिल करने के लिए जल्द दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। इस दौरान अरविंद श्रीवास्तव, संजय सिंह, शिवेंद्र श्रीवास्तव सहित अन्य विद्यालयों के प्रबंधक भी उपस्थित रहे। निजी विद्यालय प्रबंधकों का कहना है कि सीमित आय वाले शिक्षकों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलने से उनके आर्थिक और सामाजिक संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

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