
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंब्रा इलाके में गुरुवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब एक पूर्व सेना कर्मी ने कथित तौर पर एक महिला के उत्पीड़न को लेकर तीन युवकों पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।
यह घटना कैलाश नगर स्थित बिस्मिल्लाह चॉल के पास, सुमन ताई चव्हाण हिंदी प्राइमरी स्कूल के नजदीक हुई, जिसने पूरे इलाके को दहशत और सवालों के घेरे में डाल दिया।
जानकारी के अनुसार, यह घटना 2 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 11:30 बजे की है। आरोपी की पहचान 51 वर्षीय जयन शिवानंदन नायर के रूप में हुई है, जो पूर्व में भारतीय सेना में रह चुका है और वर्तमान में मजदूरी तथा ट्रक चालक के रूप में काम करता था। प्रारंभिक जांच में उसके खिलाफ किसी आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं मिली है।
घटना की शुरुआत एक महिला, अनवारा बीबी शेख, और तीन युवकों के बीच हुए विवाद से हुई। आरोप है कि ये तीनों युवक लंबे समय से महिला को परेशान कर रहे थे और घटना वाले दिन भी कथित रूप से उसके साथ बदसलूकी की गई। विवाद बढ़ने पर महिला ने नायर को मौके पर बुलाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नायर मौके पर एक लोडेड देशी रिवॉल्वर के साथ पहुंचा और बहस के दौरान अचानक उसने तीनों युवकों पर नजदीक से कई राउंड फायरिंग कर दी।
इस गोलीबारी में 29 वर्षीय अकबर अब्दुल शेख की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अब्दुल हसन शेख और समीर अहमद शेख गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत कळसेकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने अकबर को मृत घोषित कर दिया।
फायरिंग के बाद आरोपी मौके से कार में फरार हो गया, लेकिन पुलिस ने तेजी दिखाते हुए कुछ ही दूरी पर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से इस्तेमाल किया गया देशी रिवॉल्वर भी बरामद कर लिया गया है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम सहित भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में शामिल महिला के खिलाफ भी पुलिस ने कार्रवाई की है। फिलहाल पुलिस इस मामले के हर पहलू की गहन जांच कर रही है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या महिला के साथ वास्तव में उत्पीड़न हुआ था, विवाद की सटीक स्थिति क्या थी और आरोपी के पास अवैध हथियार कैसे आया। आरोपी ने पूछताछ में दावा किया है कि उसे यह हथियार पहले मिला था, जिसे उसने अपने पास रख लिया था।
बताया जा रहा है कि नायर महिला को अपनी "मुंहबोली बहन" मानता था और उसी के बचाव में उसने यह कदम उठाया। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर कानून अपने हाथ में लेने और कथित 'विजिलांटे न्याय' को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
मुंब्रा जैसे घनी आबादी वाले इलाके में दिनदहाड़े हुई यह फायरिंग न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि व्यक्तिगत विवाद किस तरह अचानक हिंसक रूप ले सकते हैं। फिलहाल यह मामला कानून और समाज दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है, जिसमें न्यायिक प्रक्रिया ही अंतिम सच्चाई तय करेगी।
