
सहकारिता में सहकार' अभियान के अंतर्गत गुरुवार को अपेक्स बैंक सभागार में नाबार्ड एवं शीर्ष सहकारी बैंक द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम कुमार दक ने सहकारी तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त निगरानी व्यवस्था को लेकर स्पष्ट और कठोर निर्देश जारी किए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्री श्री दक ने कहा कि सहकारी समितियों में किसी भी प्रकार के गबन और घोटाले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे तथा ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि समितियों की ऑडिट एवं आमसभा समयबद्ध रूप से सम्पन्न होने पर अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी सहकारी समितियों की ऑडिट अनिवार्य रूप से जून माह से पूर्व तथा आमसभा सितम्बर माह से पूर्व सम्पन्न करवाई जाए। आमसभा में सहकारिता विभाग के प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य होगी तथा इसकी फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। साथ ही आमसभा से पूर्व इसकी सूचना समाचार पत्रों में प्रकाशित कर आमजन को अवगत कराने तथा समिति की सम्पत्ति एवं जमाओं की जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश भी दिए गए।
मंत्री ने यह भी कहा कि जो समितियां ऑडिट हेतु आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवा रही हैं, उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाई जाए। गबन एवं घोटालों के मामलों में वसूली सुनिश्चित की जाए तथा दोषी व्यक्ति एवं उसके परिवार की संपत्ति को अटैच किया जाए।
उन्होंने राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत ऋण वसूली शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने तथा नए आवेदकों को ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही ऋण वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने और फीडबैक के आधार पर कमीशनखोरी में लिप्त कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए।
श्री दक ने सहकारी बैंकों के विस्तार पर जोर देते हुए नई शाखाएं खोलने, नए खाते बढ़ाने, जमाराशि वृद्धि करने तथा अकृषि ऋण वितरण पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए। उन्होंने पैक्स कम्प्यूटराइजेशन प्रोजेक्ट के अंतर्गत शत-प्रतिशत डायनामिक डे-एंड सुनिश्चित करने तथा पैक्स स्तर पर आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने को कहा।
कार्यशाला में सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने 'म्हारो खातो, म्हारो बैंक' विषय पर चर्चा करते हुए अधिक से अधिक दुग्ध सहकारी समितियों के खाते सहकारी बैंकों में खोलने पर बल दिया। राजफेड के प्रबंध निदेशक श्री सौरभ स्वामी ने कहा कि दुग्ध सहकारी समितियों एवं सदस्यों द्वारा सहकारी बैंकों में लेनदेन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा जिला स्तर पर इस दिशा में कार्यवाही आवश्यक है।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. आर. रवि बाबू ने गुजरात के बनासकांठा मॉडल का उल्लेख करते हुए सहकारी संस्थाओं के बीच समन्वय और सामंजस्य के माध्यम से प्रगति की आवश्यकता जताई। कार्यशाला में नाबार्ड के शीर्ष सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक श्री रणजीत सिंह चूंडावत, सहकार से समृद्धि के कंसल्टेंट श्री आर.एस. जोधा तथा चूरू सीसीबी के प्रबंध निदेशक श्री मदनलाल द्वारा भी प्रस्तुतीकरण दिया गया।
कार्यशाला में नाबार्ड, सहकारिता विभाग, डेयरी, मत्स्य पालन एवं अपेक्स बैंक के वरिष्ठ अधिकारी तथा सभी केन्द्रीय सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशक उपस्थित रहे। यह कार्यशाला सहकारी तंत्र में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और डिजिटल सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।
