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सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के उप प्राचार्य का पदभार लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल ने संभाला

Prathakal 4 months ago

सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ में प्रशासनिक और शैक्षणिक नेतृत्व का एक नया अध्याय शुरू हुआ है, जहां लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल ने आधिकारिक रूप से उप प्राचार्य का पदभार ग्रहण कर लिया है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर स्कूल के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया ने नए उप प्राचार्य का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें विद्यालय की संपूर्ण कार्यप्रणाली, गौरवशाली परंपराओं तथा प्रशासनिक ढांचे से विस्तारपूर्वक अवगत कराया।

जनसम्पर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल आर्मी एजुकेशनल कोर (AEC) की एक बेहद दक्ष, कुशल एवं अनुभवी सैन्य अधिकारी हैं। देश सेवा और सैन्य मूल्यों को आत्मसात करने वाली लेफ्टिनेंट कर्नल ठकराल एक दूसरी पीढ़ी की सेना अधिकारी हैं, जिन्होंने 16 सितंबर 2006 को भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया था। वह देश के प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्थान ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई की पूर्व छात्रा भी रही हैं। शैक्षणिक योग्यता के मोर्चे पर उन्होंने जम्मू विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर (एमए) की उपाधि प्राप्त की है।

लेफ्टिनेंट कर्नल ईशा ठकराल के पास शिक्षा, सैन्य नेतृत्व, उच्च स्तरीय प्रशासन एवं जनसंपर्क के क्षेत्र में काम करने का एक व्यापक और अनुकरणीय अनुभव है। वर्ष 2008 से 2011 तक उन्होंने देश की विख्यात भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून में जनसंपर्क अधिकारी (PRO) के रूप में अपनी अनुकरणीय सेवाएं दी थीं। इस विशिष्ट कार्यकाल के दौरान उन्होंने आईएमए में प्रशिक्षण ले रहे जेंटलमैन कैडेट्स के कठिन प्रशिक्षण की कमान संभालने के साथ-साथ संस्थागत संचार, मीडिया प्रबंधन एवं आउटरीच गतिविधियों को सुदृढ़ करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल में उप प्राचार्य का कार्यभार ग्रहण करने के तुरंत बाद लेफ्टिनेंट कर्नल ठकराल ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने विद्यालय की ऐतिहासिक और शैक्षणिक उपलब्धियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने कैडेट्स के सर्वांगीण विकास पर जोर देते हुए सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ को देश का एक अग्रणी और अनुकरणीय संस्थान बनाने के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता जताई, जो आने वाले समय में संस्थान के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

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