
राजस्थान की राजधानी में सत्ता और जनसेवा के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संसदीय कार्य, विधि एवं विधिक कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने मंगलवार को विधायकों के साथ उच्च स्तरीय समन्वय बैठक की।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के विशिष्ट निर्देशों के अनुपालन में सिविल लाइंस स्थित राजकीय आवास पर आयोजित इस बैठक ने प्रदेश के विकास और प्रशासनिक तत्परता को एक नई ऊर्जा प्रदान की है। इस रणनीतिक संवाद का मुख्य केंद्र बिंदु क्षेत्रीय समस्याओं का त्वरित निस्तारण, लंबित विकास परियोजनाओं में गति लाना और जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं में प्रभावी समन्वय स्थापित करना रहा, ताकि शासन का लाभ सीधे अंतिम छोर तक पहुँच सके।
बैठक की गंभीरता को रेखांकित करते हुए श्री पटेल ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार आमजन की पीड़ा को दूर करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस संकल्प की सिद्धि में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी एक अनिवार्य स्तंभ है। उन्होंने उपस्थित सभी विधायकों से पुरजोर आग्रह किया कि वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की प्रमुख चुनौतियों और विकास की अनिवार्यताओं को प्राथमिकता के आधार पर साझा करें। इस दौरान मंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि वे जनप्रतिनिधियों द्वारा प्राप्त सुझावों और शिकायतों पर न केवल गंभीरता से विचार करें, बल्कि एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर उसकी नियमित समीक्षा भी सुनिश्चित करें।
संसदीय कार्य मंत्री के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में विधायक श्रीमती ऋतु बनावत, श्री जीवाराम चौधरी, श्री चंद्रभान आक्या, श्रीमती प्रियंका चौधरी एवं श्री गणेशराज बंसल ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों की जमीनी वास्तविकताओं और ज्वलंत मुद्दों को मंच पर रखा, साथ ही विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नवाचारी सुझाव भी प्रस्तुत किए। बैठक के दौरान सरकारी योजनाओं की पहुँच को सुदृढ़ बनाने, शासन-प्रशासन की पारदर्शिता बढ़ाने और जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक परिणामोन्मुख बनाने पर विस्तार से विमर्श किया गया। श्री पटेल ने अंत में विश्वास जताया कि विधायकों के साथ निरंतर संवाद की यह प्रक्रिया समावेशी नीतियों के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी, जिससे प्रदेश के समग्र विकास को एक नई गति और आमजन को सुगम सेवाएँ प्राप्त होंगी।
