
प्रेम प्रकाश मंडल के संस्थापक सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के चतुर्थ पीठाधीश्वर, मर्यादा मूर्ति सतगुरु स्वामी हरिदास राम जी महाराज का 97वां पंचदिवसीय जन्मोत्सव 1 मई, पूर्णिमा के पावन अवसर पर भक्ति, सेवा और सुमिरन के अनूठे संगम के साथ हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुआ।
आध्यात्मिक चेतना और लोक कल्याण के उद्देश्य को समर्पित इस उत्सव के समापन पर आचार्य श्री की शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए सेवा कर्म को चरितार्थ किया गया।
उत्सव के अंतिम दिन प्रातः 7 बजे से ही भक्ति का प्रवाह प्रारंभ हुआ, जिसमें नित्य नियम प्रार्थना और संत महात्माओं द्वारा सतगुरु स्वामी हरिदास राम जी महाराज की महिमा का भावपूर्ण गुणगान किया गया। भक्तों ने स्वामी हरिदास राम जी महाराज के रिकॉर्डेड प्रवचनों का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में सत्यनारायण भगवान की कथा, श्रीमद्भगवद्गीता और श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ साहिब के पाठों का विधिवत भोग परायण संपन्न हुआ। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन, महा प्रसादी भोग और बधाई गीतों के गायन ने वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय कर दिया।
स्वामी हरिदास राम जी महाराज की शिक्षाओं को धरातल पर उतारते हुए, पूज्य स्वामी मोहन प्रकाश जी महाराज के पावन सान्निध्य में पंच दिवसीय उत्सव के दौरान व्यापक सेवा अभियान चलाए गए। सेवा के संकल्प को सार्थक करते हुए अमरापुर अन्न भोजन प्रसादम के अंतर्गत एस.एम.एस. हॉस्पिटल के बाहर जरूरतमंदों को नमकीन पुलाव, छाछ, लस्सी, शरबत, मिल्क रोज और फल वितरित किए गए। इसी क्रम में निर्माण नगर आश्रम केयर होम अनाथालय में निराश्रित बच्चों को फ्रूटी, छाछ, फल और पाठ्य सामग्री भेंट की गई। एस.एफ.एस. मानसरोवर स्थित सतगुरू स्वामी हरिदास राम उद्यान में भी राहगीरों के लिए शीतल पेय और फल वितरण का आयोजन हुआ। उत्सव की पूर्णाहुति पर कुष्ठ आश्रम के रोगियों के लिए विशेष रूप से भोजन और फल भेजे गए।
पूर्णिमा के दिन आयोजित विशाल आम भंडारे में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु दरबार में शीश नवाकर गुरु का प्रसाद ग्रहण किया। इस भव्य आयोजन में स्वामी मनोहर लाल जी महाराज, संत मोनूराम जी महाराज, संत नवीन जी, संत गुरुदास जी, संत हरीश जी, भगत जीतूराम जी, भगत दीपक जी, भगत पुनीत, अविनाश और ऋषि भरत सहित अनेक संत-महात्माओं ने उपस्थिति दर्ज कराई और स्वामी हरिदास राम जी महाराज के जीवन दर्शन एवं उनके द्वारा दिखाए गए सेवा मार्ग पर विस्तार से प्रकाश डाला। यह पंचदिवसीय आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि मानवता की निस्वार्थ सेवा का एक अनुपम उदाहरण बनकर संपन्न हुआ।
