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सेमीकंडक्टर की नई राजधानी बनेगा असम? असम में टाटा का मेगा OSAT प्लांट शुरू

Prathakal 1 week ago

भारत की सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रगति दर्ज करते हुए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स असम के मोरीगांव जिले के जगिरोड में अपने आगामी सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्ट और पैकेजिंग (OSAT) संयंत्र में चिप पैकेजिंग और परीक्षण कार्यों की शुरुआत की तैयारी कर रही है।

यह परियोजना न केवल टाटा समूह के लिए बल्कि भारत के व्यापक सेमीकंडक्टर मिशन के लिए भी एक निर्णायक मील का पत्थर मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य घरेलू चिप इकोसिस्टम को मजबूत करना और विदेशी पैकेजिंग हब पर निर्भरता को कम करना है।

जगिरोड में स्थापित किया जा रहा यह संयंत्र टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसे देश का पहला स्वदेशी ग्रीनफील्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट प्लांट बताया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 27,000 करोड़ रुपये के भारी निवेश के साथ नगाॅंव पेपर मिल की पुरानी साइट पर आकार ले रही है। इस इकाई का उद्देश्य ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, संचार और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए घरेलू और वैश्विक ग्राहकों को सेवा प्रदान करना है।

सरकारी और टाटा समूह से जुड़ी जानकारी के अनुसार इस संयंत्र की क्षमता अत्यंत विशाल है, जिसमें प्रतिदिन लगभग 48 मिलियन सेमीकंडक्टर चिप्स के पैकेजिंग की क्षमता प्रस्तावित है, जो वार्षिक आधार पर लगभग 15,600 मिलियन चिप्स तक पहुँच सकती है। यह OSAT सुविधा वायर बॉन्ड, फ्लिप-चिप और इंटीग्रेटेड सिस्टम पैकेजिंग (ISP) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित होगी, जो इसे सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के बैक-एंड हिस्से में एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करती है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2024 की शुरुआत में मंजूरी प्रदान की थी, जिसके बाद निर्माण कार्य को शीघ्र प्रारंभ करने का निर्देश दिया गया था। शुरुआती चरणों में वर्ष 2025 तक आंशिक निर्माण पूरा होने की उम्मीद जताई गई थी, जबकि अब इस संयंत्र के पहले चरण यानी फेज-1 के औपचारिक रूप से अप्रैल 2026 में चालू होने की संभावना है। इसी समय से बड़े पैमाने पर चिप पैकेजिंग की व्यावसायिक शुरुआत मानी जाएगी, जिसके बाद 2026 के दौरान उत्पादन क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा।

रोजगार और क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पूर्ण रूप से संचालन में आने पर इस संयंत्र से लगभग 15,000 प्रत्यक्ष रोजगार और 11,000 से 13,000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है, जबकि कुल प्रभाव 25,000 से 27,000 नौकरियों तक पहुँच सकता है। इस परियोजना को पूर्वोत्तर भारत में एक मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्लस्टर के रूप में विकसित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है, जो क्षेत्र को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने में मदद करेगा।

यह परियोजना भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के तहत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश के पहले बड़े पैमाने के स्वदेशी OSAT संयंत्रों में से एक है। इससे भारत की वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ ताइवान, मलेशिया, वियतनाम और चीन जैसे पारंपरिक पैकेजिंग केंद्रों पर निर्भरता भी कम होगी। यह पहल असम को एक उभरते हुए हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती है और भारत के संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम जिसमें डिजाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग शामिल हैं और उसको सशक्त बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।

उद्योग जगत में इस परियोजना को पहले से ही वैश्विक ग्राहकों से समर्थन मिल रहा है, जिसमें ऑटोमोटिव सेमीकंडक्टर क्षेत्र में क्वालकॉम जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी भी शामिल है, जो उत्पादन शुरू होने से पहले ही मांग और विश्वसनीयता को मजबूत आधार प्रदान करती है। कुल मिलाकर, जगिरोड में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का यह सेमीकंडक्टर संयंत्र भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक अध्याय जोड़ता है, जो आने वाले वर्षों में देश को वैश्विक चिप निर्माण और पैकेजिंग मानचित्र पर एक मजबूत स्थान दिलाने की क्षमता रखता है।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Prathakal