
नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए निवेश का सबसे सुरक्षित माध्यम माने जाने वाले सोने की कीमतों ने आज एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया है। वैश्विक बाजार में हो रही उथल-पुथल और घरेलू मांग में आई अचानक तेजी के कारण देश के प्रमुख सर्राफा बाजारों में सोने के दाम नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
आज बाजार खुलते ही सोने की अलग-अलग शुद्धता श्रेणियों में जो बदलाव देखे गए, उसने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों को सतर्क कर दिया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में आज 24 कैरेट सोने की कीमत, जिसे सबसे शुद्ध (99.9%) माना जाता है, ₹15,235 प्रति ग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। यह दर अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है। 24 कैरेट सोना आमतौर पर सिक्कों और बार के रूप में निवेश के लिए उपयोग किया जाता है। वहीं, आभूषण बनाने के लिए सबसे अधिक मांग वाले 22 कैरेट सोने (91.6% शुद्धता) की कीमत आज ₹13,965 प्रति ग्राम दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, जो लोग हल्के और बजट अनुकूल आभूषणों की तलाश में हैं, उनके लिए 18 कैरेट सोने (75% शुद्धता) का भाव ₹11,426 प्रति ग्राम रहा।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतों में यह तेजी अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रेरित है। डॉलर की मजबूती और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं। भारतीय बाजार में भी शादियों का सीजन होने के कारण मांग में भारी इजाफा हुआ है, जिससे कीमतों को और बल मिला है। सर्राफा व्यापारियों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले हफ्तों में कीमतें और भी अधिक बढ़ सकती हैं।
कानूनी और आधिकारिक दृष्टिकोण से देखें तो सरकार और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) लगातार उपभोक्ताओं को हॉलमार्क वाले आभूषण खरीदने की सलाह दे रहे हैं। शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए हॉलमार्किंग अब अनिवार्य हो चुकी है, जिससे ग्राहकों को उनके द्वारा चुकाई गई कीमत का सही मूल्य मिल सके। बाजार में इन दरों के लागू होने के बाद, विभिन्न राज्यों के स्थानीय करों और मेकिंग चार्ज के कारण अंतिम कीमत में थोड़ा अंतर देखा जा सकता है।
निष्कर्षतः, सोने की इन बढ़ती कीमतों ने भविष्य की आर्थिक योजनाओं पर गहरा प्रभाव डाला है। जहां एक ओर यह मौजूदा निवेशकों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आम खरीदार के लिए अपनी जमा पूंजी से सोना खरीदना एक कठिन चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले समय में वैश्विक बाजार की चाल और मुद्रा विनिमय दरों पर ही सोने की अगली दिशा निर्भर करेगी।
