
नई दिल्ली। वैश्विक भू-राजनीतिक मोर्चे पर बढ़ते तनाव और अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार में मंदी का दौर गहराता जा रहा है। घरेलू शेयर बाजार में आज लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य और राजनीतिक तनाव के सीधे असर के कारण शुरुआती कारोबार में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स करीब 400 अंक तक टूट गया। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी-50 भी बिकवाली के भारी दबाव के चलते 23,250 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया। इस चौतरफा गिरावट के कारण ब्रॉडर मार्केट में भी घबराहट देखी गई, जिससे सुबह के सत्र में अधिकांश सेक्टर्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर बिकवाली का दबाव साफ दिखने लगा था। सुबह 9 बजकर 22 मिनट पर सेंसेक्स 318.82 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,948.52 अंक पर संघर्ष कर रहा था। इससे पिछले सत्र में सेंसेक्स 74,267.34 अंक पर बंद हुआ था, लेकिन आज बाजार खुलते ही यह लुढ़ककर 73,945.20 अंक पर आ गया। ठीक यही स्थिति निफ्टी की भी रही, जो 107.10 अंक यानी 0.46 प्रतिशत फिसलकर 23,275.50 अंक के स्तर पर आ गया। बाजार की इस मंदी का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी आज कमजोरी के साथ खुला। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 0.1 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता हुआ 95.06 के स्तर पर खुला, जबकि पिछले सत्र में यह 94.99 पर बंद हुआ था।
सेंसेक्स के शीर्ष 30 प्रमुख शेयरों का विश्लेषण किया जाए तो उनमें से 26 शेयर भारी बिकवाली के कारण लाल निशान के साथ खुले। प्रमुख वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी बजाज फाइनेंस के शेयरों में सबसे अधिक 2.82 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त इटरनल, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, ट्रेंट, पावरग्रिड, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट और भारती एयरटेल जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर भी उल्लेखनीय रूप से टूट गए। हालांकि, इस चौतरफा मंदी के बीच सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कुछ शेयरों ने बाजार को संभालने का प्रयास किया। इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयरों में लिवाली देखी गई, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग 2 प्रतिशत की बढ़त बनाने में सफल रहा। आईटी के साथ-साथ निफ्टी मेटल इंडेक्स ने भी आंशिक मजबूती प्रदर्शित की, जबकि निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर सेक्टर्स लगातार दबाव में बने रहे।
वैश्विक स्तर पर इस गिरावट की मुख्य वजह ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता सैन्य गतिरोध है। ईरान ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक खुली धमकी दी है कि अगर इजरायल और लेबनान के बीच तत्काल प्रभाव से शांति कायम नहीं होती है, तो वह संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जारी द्विपक्षीय बातचीत को पूरी तरह से बंद कर देगा। इसके साथ ही ईरान ने वैश्विक तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' को पूरी तरह से ब्लॉक करने की चेतावनी दी है। ईरान का स्पष्ट कहना है कि जब तक इजरायली सेना लेबनान की धरती से पूरी तरह पीछे नहीं हट जाती, तब तक किसी भी प्रकार की कूटनीतिक वार्ता संभव नहीं है। इस बयान के बाद दुनिया भर के वित्तीय और ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मच गया।
इसी बीच, वैश्विक आर्थिक महाशक्ति अमेरिका के रुख ने इस तनाव को और हवा दे दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक हालिया साक्षात्कार में कहा कि अगर ईरान के साथ जारी बातचीत खत्म भी हो जाती है, तो उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने इस कूटनीतिक बातचीत को बेहद उबाऊ करार दिया। इस राजनीतिक खींचतान के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया। वैश्विक मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड 0.44 प्रतिशत की आंशिक गिरावट के साथ 94.56 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का यह संकट जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों को और अधिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
