
जयपुर स्थित श्री अमरापुर स्थान में प्रेम प्रकाश मंडल के चतुर्थ पीठाधीश्वर सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के उतराधिकारी मर्यादामूर्ति सतगुरु स्वामी हरिदास राम जी महाराज का पंच दिवसीय जन्मोत्सव सेवा, भक्ति और सुमिरन के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया जा रहा है, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सेवा का प्रभावी संदेश भी उभरकर सामने आया है।
जन्मोत्सव के तृतीय दिवस पर निर्माण नगर स्थित आश्रम केयर होम अनाथालय में विशेष सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान संत महात्माओं ने निराश्रित बच्चों को फल, जूस, मिष्ठान, बिस्कुट के पैकेट तथा अध्ययन सामग्री जैसे पेंसिल, ड्राइंग बॉक्स आदि उपहार स्वरूप प्रदान किए। लगभग दो घंटे तक संतों ने बच्चों के साथ समय व्यतीत कर उन्हें स्नेह और अपनत्व का अनुभव कराया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने भी संत महात्माओं के साथ भक्ति भाव से भजन प्रस्तुत किए, जिससे वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक और भावनात्मक बना रहा।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी मोहन प्रकाश जी महाराज ने कहा कि "सेवा परमो धर्म" आचार्य श्री सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज की प्रमुख शिक्षा है और यही मंडल का मूल उद्देश्य भी है। उन्होंने बताया कि श्री अमरापुर स्थान के बाहर अन्न-भोजन प्रसादम तथा एस.एम.एस. अस्पताल के बाहर नियमित रूप से जल, नमकीन चावल पुलाव का वितरण निरंतर संचालित किया जा रहा है तथा जन्मोत्सव के दौरान छाछ भी पिलाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे महान संत युगपुरुष श्री 1008 सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज की अमूल्य शिक्षाओं को हिन्दी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी उनसे प्रेरणा प्राप्त कर सके। उनके द्वारा रचित आध्यात्मिक वाणी, दोहे, पद, छंद, भजन और कविताओं में सामाजिक समरता एवं विश्व बंधुत्व का संदेश विद्यमान है।
कार्यक्रम के तहत गुरुवार 30 अप्रैल को शाम 5 से 7 बजे तक संकीर्तन मंडली द्वारा भजन संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा। वहीं, उत्सव का समापन शुक्रवार 1 मई को मर्यादामूर्ति श्री 108 स्वामी हरिदासराम जी महाराज के 97वें जन्मोत्सव पर होगा, जिसमें सुबह 7 से 11 बजे तक संतों का सत्संग, ग्रंथ, गीता के भोग साहब, भगवान श्री सत्यनारायण कथा, दीप प्रज्वलन, बधाई गीत, महाप्रसादी भोग तथा आम भंडारा प्रसादी जैसे धार्मिक आयोजन संपन्न होंगे।
इस प्रकार श्री अमरापुर स्थान जयपुर में आयोजित यह पंच दिवसीय जन्मोत्सव भक्ति और सेवा के माध्यम से समाज में समरसता, करुणा और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त संदेश प्रदान करते हुए संपन्न होगा।
