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सिकल सेल एनीमिया पर राजस्थान का बड़ा अभियान, 37 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग पूरी

सिकल सेल एनीमिया पर राजस्थान का बड़ा अभियान, 37 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग पूरी

Prathakal 2 months ago

तस्वीर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पारंपरिक साफा और दुपट्टा पहने हुए एक कार्यक्रम के मंच पर लकड़ी की वस्तु पकड़े हुए नजर आ रहे हैं।

तस्वीर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पारंपरिक साफा और दुपट्टा पहने हुए एक कार्यक्रम के मंच पर लकड़ी की वस्तु पकड़े हुए नजर आ रहे हैं।

राजस्थान सरकार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जनजातीय अंचलों में सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। बीमारी की पहचान से लेकर उपचार, नियमित फॉलोअप, टीकाकरण, काउंसलिंग और जागरूकता तक एक मजबूत स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र तैयार किया जा रहा है।

राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 के अनुरूप राज्य के जनजातीय बहुल जिलों में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि समयबद्ध उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को इसके दुष्प्रभावों से बचाना है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का कहना है कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 के अनुरूप राजस्थान सरकार जनजातीय क्षेत्रों में मजबूत स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र तैयार कर सिकल सेल एनीमिया से लड़ाई को प्रभावी बना रही है। प्रदेश में चल रहा यह अभियान 'स्वस्थ जनजातीय समाज-स्वस्थ राजस्थान' की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत कर रहा है।

राज्य सरकार ने राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनजातीय अंचलों की करीब 37.50 लाख आबादी की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके मुकाबले प्रदेश में 37.02 लाख लोगों की स्क्रीनिंग पूरी कर 98.72 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।

जनजातीय बहुल क्षेत्रों में चलाए गए इस व्यापक अभियान के तहत उदयपुर में 11 लाख 12 हजार 590, बांसवाड़ा में 10 लाख 39 हजार 295, डूंगरपुर में 8 लाख 02 हजार 150, प्रतापगढ़ में 4 लाख 26 हजार 012, सिरोही में 1 लाख 63 हजार 910, बारां में 90 हजार 191, पाली में 41 हजार 216, चित्तौड़गढ़ में 13 हजार 357 तथा राजसमंद में 13 हजार 073 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।

राज्य सरकार सिकल सेल एनीमिया को केवल बीमारी के रूप में नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा से जुड़े विषय के रूप में देखते हुए इसे जड़ से रोकने की दिशा में काम कर रही है। इसी उद्देश्य से सामूहिक स्क्रीनिंग शिविरों के साथ प्रसव-पूर्व जांच और पारिवारिक स्क्रीनिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

स्कूलों और समुदायों में जागरूकता गतिविधियों तथा सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से लोगों को बीमारी के लक्षण, जांच और बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है। स्क्रीनिंग में चिन्हित लोगों को आगे की जांच, उपचार और आवश्यक परामर्श से जोड़कर 'पहचान से उपचार' तक की पूरी प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है।

उदयपुर स्थित सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस फॉर सिकल सेल डिजीज जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया के उपचार और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा इस केंद्र को 'सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस फॉर सिकल सेल डिजीज' का दर्जा दिया गया है।

इस केंद्र में नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग, निदान, व्यापक देखभाल, टीकाकरण, प्रशिक्षण, जागरूकता, फिजियोथेरेपी, काउंसलिंग और दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जैसी सेवाएं एक ही तंत्र के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उदयपुर के सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस में अब तक 6,160 ओपीडी और 306 आईपीडी सेवाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। यहां 589 सिकल सेल रोगियों और 3,000 सिकल सेल वाहकों की पहचान हुई है। केंद्र द्वारा 32 हजार नवजात की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 621 नवजात पॉजिटिव पाए गए।

इसी प्रकार 8 हजार 500 गर्भवती महिलाओं की एएनसी स्क्रीनिंग में 500 पॉजिटिव मामलों की पहचान की गई है। स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता बढ़ाने के लिए 1,107 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि सिकल सेल रोगियों, उनके परिवारों और नवजात स्क्रीनिंग से जुड़े मामलों में 5,893 काउंसलिंग की जा चुकी हैं।

रोगियों को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने के लिए 453 सिकल सेल रोगियों का टीकाकरण किया गया है और जरूरतमंदों को 160 दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं।

सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ राजस्थान सरकार ने जागरूकता, स्क्रीनिंग और प्रबंधन की त्रिस्तरीय रणनीति अपनाई है। जनजातीय क्षेत्रों में लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करने के साथ संभावित मरीजों की पहचान के लिए व्यापक स्क्रीनिंग की जा रही है।

चिन्हित मरीजों के लिए हाइड्रोक्सीयूरिया थेरेपी, टीकाकरण, परामर्श और फॉलोअप देखभाल को मजबूत किया जा रहा है। चिकित्सकों और नर्सिंग कर्मियों को प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य विभाग की क्षमता में भी लगातार वृद्धि की जा रही है। राजस्थान में सिकल सेल नियंत्रण के लिए विकसित यह तंत्र बीमारी की पहचान से उपचार तक एक संगठित स्वास्थ्य मॉडल के रूप में आगे बढ़ रहा है।

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