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TFPC की टोकन स्ट्राइक से ठप हुई शूटिंग ; क्या अभिनेताओं की भारी फीस ने डुबोया प्रोड्यूसर्स को?

Prathakal 1 week ago

तमिल फिल्म उद्योग, जिसे कोलिवुड के नाम से भी जाना जाता है, एक बार फिर गंभीर औद्योगिक टकराव के केंद्र में आ गया है। तमिलनाडु प्रोड्यूसर्स काउंसिल (TFPC) ने अपने हालिया आम सभा बैठक के बाद यह चेतावनी दी है कि यदि अभिनेता भविष्य में प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल पर काम करने के लिए सहमत नहीं होते हैं, तो पूरे उद्योग में पूर्ण पैमाने पर शूटिंग स्ट्राइक की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

यह घोषणा फिल्म निर्माण प्रणाली में चल रहे गहरे वित्तीय और संरचनात्मक विवादों की ओर इशारा करती है।

TFPC ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में 2 मई, 2026 को एक प्रतीकात्मक टोकन स्ट्राइक लागू की गई है, जिसके चलते तमिल फिल्म इंडस्ट्री में शूटिंग कार्य पूरी तरह से बाधित हो गया है। इसके साथ ही पोस्ट-प्रोडक्शन गतिविधियों जैसे एडिटिंग, डबिंग और वीएफएक्स का काम भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, जिससे कई परियोजनाएं अनिश्चितता की स्थिति में पहुंच गई हैं।

इस पूरे विवाद का केंद्र बिंदु कलाकारों की बढ़ती फीस है, जिसे लेकर प्रोड्यूसर्स लंबे समय से चिंता जता रहे हैं। प्रोड्यूसर्स का तर्क है कि बड़े सितारों की उच्च और निश्चित फीस के कारण फिल्म निर्माण लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पातीं। इसके बावजूद कलाकारों को पूरी तयशुदा फीस का भुगतान करना पड़ता है, जिससे निर्माताओं को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इसी समस्या के समाधान के रूप में TFPC ने प्रॉफिट और लॉस शेयरिंग आधारित मॉडल की मांग रखी है, जिसके तहत मध्यम बजट की फिल्मों में कलाकारों को फिल्म के मुनाफे या नुकसान में हिस्सेदारी के आधार पर भुगतान किया जाए। काउंसिल का मानना है कि इससे फिल्म उद्योग में वित्तीय संतुलन स्थापित किया जा सकता है और जोखिम को कम किया जा सकता है।

TFPC ने यह भी कहा है कि उन्होंने इस मुद्दे पर कलाकार संघ नडिगर संगम के साथ कई दौर की बातचीत की, लेकिन कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। ऐसे में परिषद ने यह टोकन स्ट्राइक एक दबाव रणनीति के रूप में अपनाई है, ताकि उद्योग में व्याप्त गतिरोध को तोड़ा जा सके। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि यदि भविष्य में भी सहमति नहीं बनती है, तो यह विरोध एक व्यापक और पूर्ण उद्योग-स्तरीय हड़ताल का रूप ले सकता है।

इस निर्णय के बाद तमिल फिल्म इंडस्ट्री में व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। कई फिल्मों की शूटिंग शेड्यूल बाधित हो गई है और प्रोडक्शन कार्य ठप पड़ गया है। इसके साथ ही ओटीटी रिलीज और थिएटर रिलीज की योजनाओं पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। स्थिति को लेकर निर्माता और कलाकार पक्ष के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है और दोनों ही ओर से कड़े बयान सामने आ रहे हैं।

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