
Share market crash India Monday : वैश्विक मोर्चे पर गहराते भू-राजनीतिक संकट और बड़े संस्थागत निवेशकों के अचानक पीछे हटने से भारतीय शेयर बाजार सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर पूरी तरह से धराशायी हो गया।
सप्ताह के पहले ही कारोबारी सत्र में बाजार के भीतर चौतरफा बिकवाली का ऐसा हाहाकार देखने को मिला कि निवेशकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आने लगीं। दिनभर के उतार-चढ़ाव और बिकवाली के भारी दबाव के बाद, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 508.40 अंक यानी 0.68 प्रतिशत की एक बड़ी कमजोरी के साथ 74,267.34 के स्तर पर बंद हुआ। ठीक इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का मानक सूचकांक निफ्टी भी इस तेज गिरावट से खुद को सुरक्षित नहीं रख सका और वह 165.15 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,382.60 के स्तर पर जाकर सिमट गया, जिसने बाजार की बुनियादी स्थिरता को हिलाकर रख दिया है।
बाजार के इस गिरावट के दौर की सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इसमें केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मझोले और छोटे शेयरों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी भयंकर बिकवाली की चपेट में आ गए। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 895.85 अंक यानी 1.45 प्रतिशत की भारी कमजोरी के साथ 60,827.95 पर आ गया, तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी 159 अंक या 0.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,979.80 पर बंद हुआ। सेक्टोरल स्तर पर नजर डालें तो निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे कोर सेक्टर्स सबसे ज्यादा टूटने वाले सूचकांकों में शामिल थे। इस विपरीत माहौल के बावजूद आईटी, मीडिया और मेटल सेक्टर्स किसी तरह खुद को संभालते हुए हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे, जहां टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, इंडिगो, एचसीएल टेक और टाटा स्टील जैसे शेयर गेनर्स की सूची में रहे, जबकि एचयूएल, आईटीसी, एनटीपीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट और बजाज फाइनेंस जैसी दिग्गज कंपनियां लूजर्स के रूप में दर्ज की गईं।
तकनीकी और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस अप्रत्याशित गिरावट के पीछे कोई घरेलू कारण नहीं बल्कि सुदूर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चल रहा गंभीर घटनाक्रम है। एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च प्रमुख सुदीप शाह ने बाजार के इस नकारात्मक रुख का विश्लेषण करते हुए बताया कि निफ्टी के लिए वर्तमान में तत्काल समर्थन स्तर 23,250 से 23,230 के आसपास बना हुआ है, लेकिन यदि यह स्तर भी टूट जाता है तो निफ्टी आसानी से 23,100 के स्तर तक नीचे गिर सकता है। वहीं, छोटी अवधि के लिए ऊपर की तरफ 23,530 से 23,550 का जोन एक बड़े अवरोध के रूप में काम कर रहा है। बैंक निफ्टी के मोर्चे पर भी उन्होंने स्थिति स्पष्ट की कि नीचे की तरफ 53,200 से 53,100 के बीच मुख्य सपोर्ट है, जबकि 54,000 से 54,100 के बीच एक बड़ा रेजिस्टेंस मौजूद है, जिसे पार करना बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
बाजार के इस तरह अचानक क्रैश होने के प्रमुख आधिकारिक और रणनीतिक कारणों का आकलन करें तो इसका सीधा संबंध अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे शांति समझौते को लेकर पैदा हुई गंभीर अनिश्चितता से है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। इस भू-राजनीतिक तनाव के साथ-साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजारों से लगातार बड़े पैमाने पर की जा रही धन की निकासी ने इस दबाव को और अधिक दोगुना कर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बीते शुक्रवार को ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों में 21,106 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी-भरकम शुद्ध बिकवाली की थी। पूंजी के इस भारी बहिर्वाह और वैश्विक युद्ध जैसी परिस्थितियों की आशंका ने मिलकर दलाल स्ट्रीट के सेंटिमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे यह साफ है कि जब तक वैश्विक मोर्चे पर शांति और स्थिरता बहाल नहीं होती, तब तक भारतीय वित्तीय बाजार में अनिश्चितता का यह दौर जारी रहने वाला है।
