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लाखों दीपों से जगमगा उठी रामनगरी, पुष्पों से सजा शहर

अवधपुरी में चारों ओर दीपावली सा नजारा है। बुधवार संध्याकाल हर ओर माटी के दीप प्रज्जवलित हैं और भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए हुए भूमि पूजन का उल्लास हर जन के हृदय में प्रस्फुटित होता प्रतीत हो रहा था। रोशनी से नहायी अयोध्या नगरी मानो आसमान से चांद-तारों को धरातल पर उतार लायी हो।

हनुमानगढी से नया घाट की ओर बढें तो क्या मंदिर, क्या सडक, गली, मकान, दुकान, होटल, क्या धर्मशाला .... कोई ऐसी इमारत नहीं, जहां दीपों की श्रृंख्ला ना दिखायी पड़ती हो। तुलसी उद्यान के निकट होम्योपैथ डा. उदय सिंह का क्लीनिक है। अति उत्साह से भरे डाक्टर साहब कह रहे हैं, ''बच्चे, बुजुर्ग और युवाओं को दीप प्रज्जवलित करते देखना मन को आह्लादित कर रहा है।

अयोध्या नगरी का सौन्दर्य देखते ही बनता है।'' दीपावली पर्व का दृश्य जीवंत हो उठा है। छोटी देवकाली क्षेत्र में आतिशबाजी भी हो रही है। राम की पैढी में जन सैलाब उमड़ पड़ा है और तुलसी उद्यान के निकट यातायात थम-थम जा रहा है। मंदिरों से पूजन-भजन, घंटा-घडियाल, ढोल-मजीरे, शंख की सुर लहिरी और ताल छिडी है।

अयोध्या वासी महेन्द्र प्रसाद ने कहा, ''भजन-गायिकी में राम हैं, सीता हैं, हनुमान हैं और लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के साथ साथ अयोध्या है। हर नुक्कड के बगल मंडली जमी है, लोग राम की भक्ति में तल्लीन हैं। मानो शब्द गा रहे हैं और ध्वनि सुन रही है।''

प्रसाद ने कहा कि दिन अति विशिष्ट है और निश्चित तौर पर यह अयोध्या नगरी के इतिहास को स्वर्णाक्षरों में लिखेगा। थियेटर कलाकार रत्नाकर दुबे ने फोन पर बताया '' पूरी अवधपुरी राममय है। सडकों पर जगह जगह, घरों और दुकानों के आगे रंगोली सजी है।

घाट किनारे धार्मिक पुस्तकों की दुकानें सजी हैं, लोग भगवान श्रीराम को पढना और आत्मसात करना चाहते हैं। रामचरितमानस तो जनमानस की रूचि का विषय है। भगवा वस्त्र भी बहुतायत में मिल रहे हैं। मिष्ठान्न ऐसा घुला कि मुंह की मिठास लगातार बनी हुई है।''

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