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दीपिका कुमारी ने चलाए खूब तीर, विश्व चैम्पियन को मात देकर बनाई क्वार्टर फाइनल में जगह

दुनिया की नंबर 1 तीरंदाज दीपिका कुमारी ने पूर्व विश्व चैम्पियन रूसी ओलंपिक समिति की सेनिया पेरोवा को शूट ऑफ में हराकर टोक्यो क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह बना ली है। दीपिका ने दशूट ऑफ में परफेक्ट 10 स्कोर किया और रियो ओलंपिक की रजत पदक विजेता को हराया। इसी के साथ ही वह ओलिंपिक के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बन गई हैं। दीपिका ने कहा, 'अब आगे और कठिन होता जाएगा। मुझे बेहतर प्रदर्शन करना होगा। उम्मीद है कि ऐसा कर सकूंगी। नर्वस होने पर जीत नहीं पाऊंगी'।

बता दें कि इससे पहले भारतीय दीपिका कुमारी ने शानदार प्रदर्शन से अमेरिकी खिलाड़ी जेनिफर फर्नांडेज को 6-4 से मात देते पदक जीतने के लिए प्री-क्वार्टर में जगह बनाई थी। बता दें कि दीपिका पहला सेट हार गई थीं लेकिन लगातार दो सेट से उन्होंने जीत वापसी की। इसके बाद वो चौथा सेट हार गईं लेकिन पांचवें सेट में दीपिका ने जीत हासिल करते हुए मुकाबला अपने नाम किया।

खुद से जंग लड़ रही दीपिका

उन्होंने कहा, "जाहिर है, मैं नर्वस हूं... ओलंपिक में दबाव एक अलग स्तर पर है क्योंकि यहां पदक जीतने के लिए आपने सालों से प्रयास किया है। यह आपके भीतर की लड़ाई है और मैं यहां अपने खिलाफ जीतने की कोशिश कर रही हूं। उम्मीद का दबाव सिर्फ खुद से होता है, लोगों से नहीं क्योंकि आप हमेशा अपना प्रदर्शन बेहतर करना चाहते हैं।'

कौन है दीपिका कुमारी?

भारतीय आर्चर दीपिका कुमारी महतो बिहार, रांची की रहने वाली हैं। बिल्कुल निचले पायदान से निशानेबाजी खेल में शुरुआत करने वाली दीपिका आज अंतरराष्ट्रीय स्तर की नबर 1 खिलाड़ियों में से एक हैं। मात्र 18 साल की उम्र में उन्होंने वर्ल्ड नंबर 1 खिलाड़ी की रैंकिंग हासिल की। विश्व कप प्रतियोगिताओं में 9 गोल्ड, 12 सिल्वर और 7 ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली दीपिका अब ओलंपिक मेडल जीतने पर मेहनत कर रही हैं। यही नहीं, दीपिका टाटा स्टील कंपनी के खेल विभाग की प्रबन्धक भी हैं।

बचपन में पत्थर से तोड़ती थी आम

बचपन से ही दीपिका आर्चर में अपना करियर बनाना चाहती थी। दीपिका को पिता शिवनारायण आटो चालक व माता गीता देवी नर्स थी। उन्होंने बताया कि बचपन में दीपिका ने पेड़ पर से आम तोड़ने के लिए जिस तरह निशाना लगाया उसे देख वो हैरान रह गई थी। शुरुआत में भले ही वो पत्थर से निशाना लगाकर आम तोड़ती थी लेकिन यही शौक आज उन्हें पहचान देता नजर आ रहा है।

जीत चुकी हैं कई गोल्ड मेडल

उन्होंने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने डोला बनर्जी और बोम्बायला देवी के साथ महिला टीम रिकर्व इवेंट में भी इसी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। अपने अब तक के खेल सफर में वो कुल 37 मेडल जीत चुकी हैं।

पद्मश्री से सम्मानित

2006 में मैरीदा मेक्सिको में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में कम्पाउंट एकल प्रतियोगिता में दीपिका ने गोल्ड मेडल जीता। ऐसा करने वाली वे दूसरी भारतीय हैं। यही नहीं, विश्व कप में 3 स्वर्ण पदक जीतने वाली वाली दीपिका इकलौती भारतीय खिलाड़ी हैं। खेल में अपना अतुल्य योगदान के लिए उन्हें अर्जुन अवार्ड और पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

Dailyhunt
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