उदयपुर, 6 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय प्रबंध संस्थान उदयपुर ने सोमवार को अपने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) प्रोग्राम का वर्चुअल शुभारंभ किया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल समारोह के मुख्य अतिथि रहे।
उन्होंने इस पहल को ‘बहुत यूनिक’ और ‘अच्छी कल्पना’ बताते हुए कहा कि यह तकनीक, द्विभाषी शिक्षा और व्यापक पहुंच का प्रभावी संगम है।
मुंबई में भारी वर्षा से उड़ान में विलंब के बावजूद पीयूष गोयल विद्यार्थियों को प्रतीक्षा में न रखकर विमान से उतरते ही अपनी कार से लाइव जुड़े। समारोह में विद्यार्थी, अभिभावक, संकाय सदस्य, पूर्व विद्यार्थी और आईआईएम उदयपुर समुदाय ऑनलाइन शामिल हुए। बीबीए प्रोग्राम के अध्यक्ष प्रो. कुणाल कमल कुमार ने शुरुआत की और निदेशक प्रो. अशोक बनर्जी ने स्वागत उद्बोधन दिया।
पीयूष गोयल ने कहा कि ऑनलाइन और द्विभाषी स्वरूप प्रबंधन शिक्षा को सरल भाषा में बड़े वर्ग तक पहुंचा सकता है। 6 जुलाई के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद किया और कहा कि मातृभाषा में शिक्षा तथा राष्ट्र निर्माण में विश्वविद्यालयों की भूमिका जैसे विचार इस कार्यक्रम से जुड़े हैं।
मंत्री ने कहा कि आईआईएम ब्रांड विश्व स्तर पर पहचाना जाता है और युवाओं को नेतृत्व, प्रबंधन तथा उद्यमिता के लिए तैयार करता है। उन्होंने 2011 से आईआईएम उदयपुर की यात्रा, एक युवा बिजनेस स्कूल के रूप में उसकी पहचान और बॉम्बे शेविंग कंपनी तथा करीइट जैसे उद्यमों से जुड़े उसके उद्यमिता योगदान की सराहना की।
कोविड-19 के बाद शिक्षा और तकनीक के बदलते संबंध का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एडटेक अब सहायक साधन भर नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। लगभग 100 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ताओं वाले भारत में डिजिटल माध्यम गांव और शहर के बीच शिक्षा का सेतु बना रहे हैं। नई शिक्षा नीति भी तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के व्यापक प्रसार पर बल देती है। इसी संदर्भ में उन्होंने आईआईएम उदयपुर के ऑनलाइन और हिंदी-अंग्रेजी समर्थित बीबीए मॉडल को समयानुकूल बताया।
उन्होंने कहा कि प्रतिभा परिस्थितियों से सीमित नहीं होनी चाहिए। स्थान, भाषा, लागत, समय या आत्मविश्वास जैसी बाधाओं के बावजूद प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने छात्रवृत्ति प्रावधान की सराहना की और कहा कि यह स्नातक कार्यक्रम भारत और भारतीय उद्योग, दोनों की सेवा करेगा। उनके अनुसार आईआईएम की कक्षाएं अब स्क्रीन पर उपलब्ध होंगी, चाहे विद्यार्थी भीलवाड़ा की छोटी दुकान से जुड़ रहा हो या बस्तर के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्र से। उन्होंने ऑनलाइन डिलीवरी के साथ ऑफलाइन टेस्ट को जवाबदेह मूल्यांकन मॉडल बताया।
कार्यक्रम को मजबूत बनाने के लिए पीयूष गोयल ने चार सुझाव दिए – संकाय यात्राएं और विद्यार्थी संवाद-सत्र; सॉफ्ट स्किल, टीमवर्क और तकनीकी समझ का विकास; कारखानों, बंदरगाहों और औद्योगिक समूहों की यात्राओं से अनुभवात्मक अध्ययन; तथा वैश्विक श्रेष्ठ पद्धतियां, ऑडियो-विजुअल साधन, एनईपी के तहत क्रेडिट ट्रांसफर, संस्थागत साझेदारी और चौथे वर्ष में शोध-इंटर्नशिप।
पीयूष गोयल ने प्रथम बैच को इतिहास रचने वाला बताते हुए विद्यार्थियों से अमृत काल में विकसित भारत के निर्माण के लिए स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विनिर्माण, नवाचार और मुक्त व्यापार अवसर युवाओं के लिए नए रास्ते खोलेंगे।
प्रो. अशोक बनर्जी ने मंत्री के सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान इन पर काम करेगा और वर्ष के अंत तक प्रगति साझा करेगा। प्रो. कुणाल कमल कुमार ने कहा कि यह कार्यक्रम मानकों को कम नहीं कर रहा, बल्कि बाधाओं को दूर कर रहा है। यह संकाय-नेतृत्व, संरचित अध्ययन, नियमित सहभागिता, क्विज, परीक्षाओं, प्रतिक्रिया और सतत सुधार पर आधारित है। समारोह में अकादमिक कठोरता, समावेशी पहुंच और उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन शिक्षा पर जोर दिया गया।
–आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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