Baghpat News: बागपत जिले में बड़ौत से फुगाना तक बनने वाली प्रस्तावित सर्विस रोड को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अलग-अलग दल इस परियोजना का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने दावा किया है कि इस सड़क परियोजना की शुरुआत सबसे पहले पार्टी के सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने की थी।
रालोद का कहना है कि इस संबंध में सरकारी रिकॉर्ड भी उनकी बात की पुष्टि करते हैं। रालोद के अनुसार, सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने 4 दिसंबर 2024 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भेजा था।
इस पत्र में उन्होंने बड़ौत से फुगाना तक सर्विस रोड बनाने की जरूरत बताई थी। उनका कहना था कि इस मार्ग पर बढ़ते यातायात और लोगों की सुविधा को देखते हुए सर्विस रोड का निर्माण जरूरी है।पार्टी का दावा है कि सांसद की इस मांग के बाद संबंधित विभाग ने मामले की जांच शुरू की। इसके बाद तकनीकी जांच, विभागीय मंजूरी और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की गईं।
दिसंबर 2025 में जारी हुई अधिसूचना
Baghpat Newsरालोद नेताओं का कहना है कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने दिसंबर 2025 में इस सर्विस रोड के निर्माण को लेकर अधिसूचना जारी की। पार्टी का दावा है कि इस अधिसूचना में सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान द्वारा उठाई गई मांग का भी उल्लेख किया गया है। रालोद का कहना है कि इससे साफ होता है कि इस परियोजना की शुरुआत सांसद की पहल के बाद ही आगे बढ़ी।
रालोद ने कहा कि किसी भी विकास कार्य का श्रेय केवल राजनीतिक बयान देने से तय नहीं होना चाहिए। पार्टी का मानना है कि जिस व्यक्ति या जनप्रतिनिधि ने सबसे पहले किसी योजना के लिए आधिकारिक स्तर पर प्रयास किए हों, उसी को उसका श्रेय मिलना चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकारी दस्तावेज और अभिलेख किसी भी परियोजना की वास्तविक कहानी बताते हैं। इसलिए विकास कार्यों को लेकर तथ्यों के आधार पर ही चर्चा होनी चाहिए।
रालोद नेताओं ने क्या कहा
रालोद नेताओं ने कहा कि जनता अब केवल राजनीतिक दावों पर भरोसा नहीं करती, बल्कि प्रमाण और दस्तावेजों को भी देखती है। उनका कहना है कि राजनीति में कई लोग किसी योजना का श्रेय लेने का दावा कर सकते हैं, लेकिन इतिहास में वही प्रयास दर्ज होते हैं जो सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा बनते हैं।
पार्टी ने यह भी कहा कि विकास कार्यों को लेकर अनावश्यक विवाद करने के बजाय सभी जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र के विकास पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, यदि किसी परियोजना के श्रेय की बात हो, तो उसका फैसला तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही होना चाहिए।
