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बजरंग लाल बागड़ा की नियुक्ति पर कीर्ति आजाद का तंज, घोटाले के आरोपी को राम मंदिर ट्रस्ट में जगह क्यों?

बजरंग लाल बागड़ा की नियुक्ति पर कीर्ति आजाद का तंज, घोटाले के आरोपी को राम मंदिर ट्रस्ट में जगह क्यों?

Punjabkesari.com 3 days ago

ई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कीर्ति आजाद ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े हालिया घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने ट्रस्ट की बैठक, पदाधिकारियों के बदलाव और विश्व हिंदू परिषद (वीएमपी) से जुड़े लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कीर्ति आजाद ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद के सदस्य शामिल हैं।

उन्होंने आरएसएस की आर्थिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन के पास बड़ी-बड़ी इमारतें हैं, देशभर में कार्यक्रम होते हैं और लाखों सदस्यों का दावा किया जाता है लेकिन इसकी फंडिंग और वित्तीय गतिविधियों की सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे बड़े संगठनों के लिए सार्वजनिक लेखा-जोखा होना चाहिए।

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर होने के बाद नए सदस्य के रूप में बजरंग लाल बागड़ा की नियुक्ति पर भी कीर्ति आजाद ने टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि बागड़ा वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद के इंटरनेशनल जनरल सेक्रेटरी हैं और इससे उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठते हैं।

कीर्ति आजाद ने बजरंग लाल बागड़ा के पूर्व प्रशासनिक करियर का जिक्र करते हुए कहा कि वह भारतीय वन सेवा के अधिकारी रहे हैं और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर रह चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बागड़ा पर कथित रूप से कुछ अनियमितताओं के आरोप लगे थे और उनकी सेवाएं तय समय से पहले समाप्त की गई थीं। उन्होंने कथित चूना खरीद घोटाले सहित अन्य मामलों का उल्लेख किया और जांच का जिक्र किया।

इसके अलावा, टीएमसी के बागी सांसदों द्वारा चुनाव आयोग से अतिरिक्त समय मांगे जाने की खबरों पर भी कीर्ति आज़ाद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब किसी मामले में दस्तावेज और तथ्य जमा हो जाते हैं, तो बाद में सुधार की गुंजाइश कम रह जाती है। ये लोग पार्टी छोड़ने वाले हैं और उनके पास अपने पक्ष में पर्याप्त जवाब नहीं हैं।

बारुईपुर में नाबालिग लड़की से कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बयान को लेकर भी कीर्ति आज़ाद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता हर मामले में सांप्रदायिक दृष्टिकोण तलाशते हैं। अपराध की पीड़िता किसी भी धर्म की हो, वह सबसे पहले एक बच्ची है और ऐसे मामलों को राजनीतिक या सांप्रदायिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

–आईएएनएस

एसएके/पीएम

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