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बांग्लादेश में 'झूठे और बेबुनियाद' मामलों में बढ़ोतरी, जमानत के बाद भी रिहाई में देरी पर अवामी लीग ने जताई चिंता

बांग्लादेश में 'झूठे और बेबुनियाद' मामलों में बढ़ोतरी, जमानत के बाद भी रिहाई में देरी पर अवामी लीग ने जताई चिंता

Punjabkesari.com 4 days ago

ढाका, 6 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश की अवामी लीग ने बुधवार को देशभर में आम लोगों के खिलाफ बढ़ते ‘झूठे और बेबुनियाद’ मामलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पार्टी ने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों को अदालत से जमानत मिलने के बावजूद रिहाई में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

अवामी लीग ने सोशल मीडि‍या एक्‍स पर पोस्ट करते हुए कहा, "ये मामले अब आम लोगों के लिए एक खतरनाक जाल बन गए हैं। एक तरफ झूठे केस दर्ज होने के आरोप हैं, दूसरी तरफ जमानत मिलने के बाद भी लोगों को रिहा होने में बहुत दिक्कत होती है। कागज पर जमानत मिल जाती है, लेकिन असल में पुलिस के अंदर 'पांच-स्तरीय अदृश्य मंजूरी' सिस्टम और पैसों के खेल के कारण रिहाई रुक जाती है।"

पार्टी ने अपनी जांच का हवाला देते हुए कहा कि ढाका के अलग-अलग थानों में दर्ज कम से कम 20 मामलों में जमानत मिलने के बाद भी रिहाई में देरी के सबूत मिले हैं।

अवामी लीग का कहना है कि कानून के मुताबिक, अदालत से जमानत मिलने के बाद तुरंत उसे लागू किया जाना चाहिए। लेकिन असल में आदेश प्रशासन तक पहुंचने के बाद एक लंबी प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

पार्टी के अनुसार, "डिप्टी कमिश्नर से लेकर डिविजनल पुलिस ऑफिस, इंटेलिजेंस ब्रांच और संबंधित थाने तक हर स्तर पर जानबूझकर देरी की जाती है। आरोप हैं कि हर स्टेप पर पैसे मांगे जाते हैं।"

अवामी लीग ने यह भी कहा कि कई मामलों में जब परिवार वाले जेल के बाहर इंतजार कर रहे होते हैं, तभी कैदियों को अचानक किसी दूसरे केस में दिखाकर गिरफ्तार कर लिया जाता है।

ढाका जज कोर्ट की वकील फरज़ाना यास्मीन राखी के हवाले से पार्टी ने कहा, "राजनीतिक या विवाद से जुड़े मामलों में अगर थाने को मैनेज नहीं किया गया, तो रिहाई बहुत मुश्किल हो जाती है। जैसे ही कोई एक केस में छूटने वाला होता है, उसका नाम पास के किसी और थाने के केस में जोड़ दिया जाता है।"

पार्टी का कहना है कि देश के आपराधिक प्रक्रिया संहिता में निर्दोष लोगों को परेशान होने से बचाने के लिए जो "अंतरिम रिपोर्ट" का प्रावधान है, वह अब भ्रष्टाचार का जरिया बन गया है।

अवामी लीग ने यह भी आरोप लगाया कि जांच अधिकारी जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े प्रभावशाली लोगों को पैसे लेकर छोड़ देते हैं, जबकि गरीब और बेगुनाह लोग ही सबसे ज्यादा परेशान होते हैं।

पार्टी ने कहा कि कानूनी विशेषज्ञ जमानत को ‘संवैधानिक अधिकार’ मानते हैं। लेकिन जब यह अधिकार प्रशासनिक स्तर पर एक सामान की तरह बिकने लगे, तो लोगों का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाता है। इस समस्या को खत्म करने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे, जैसे डिजिटल ट्रैकिंग और जवाबदेही तय करना।

–आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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