CAG Audit : दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) के सीएजी ऑडिट से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल एक प्रक्रियात्मक आदेश है, न कि मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आदेश को डिस्कॉम्स की जीत या उन्हें किसी प्रकार की क्लीन चिट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आशीष सूद ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को तय की है, जिसमें सीएजी ऑडिट की कानूनी वैधता और अधिकार क्षेत्र पर विस्तार से सुनवाई होगी। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने केवल अंतिम निर्णय तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है और कहीं भी यह नहीं कहा कि सीएजी ऑडिट अवैध है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राहत की बात यह है कि सर्वोच्च न्यायालय ने रेगुलेटरी एसेट्स के परिसमापन पर लगी रोक भी अगले आदेश तक जारी रखी है। इससे दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं पर संभावित अतिरिक्त वित्तीय बोझ फिलहाल नहीं पड़ेगा। उन्होंने इसे जनहित में महत्वपूर्ण संरक्षण बताया।
“सरकार का उद्देश्य बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना और..”
सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार ने पूरे मामले में पूरी पारदर्शिता और कानून के अनुरूप कार्य किया है तथा 15 जुलाई को पूरी तैयारी के साथ अदालत में अपना पक्ष रखेगी। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता, सार्वजनिक जवाबदेही और बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना स्वतंत्र और कठोर वित्तीय जांच के लगभग 38,500 करोड़ रुपये का संभावित बोझ बिजली दरों और सरचार्ज के माध्यम से उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता। सरकार चाहती है कि उपभोक्ताओं से वसूले गए प्रत्येक रुपये का पूरा हिसाब सार्वजनिक हो।
आशीष सूद ने कहा कि निजी डिस्कॉम्स द्वारा सीएजी ऑडिट का लगातार विरोध कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो संविधान सम्मत स्वतंत्र ऑडिट से डरने का कोई कारण नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार ने भी बिजली कंपनियों के कामकाज में अधिक पारदर्शिता का विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार सुशासन, पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही के अपने संकल्प पर अडिग है तथा बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाती रहेगी।

