नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया तनाव से आपूर्ति श्रृंखलाओं में बड़ी रुकावटें पैदा हुई हैं, लेकिन मजबूत घरेलू मांग, पॉलिसी बफर, लचीली वित्तीय प्रणाली और सरकारी निवेश अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं।
यह जानकारी वित्त मंत्रालय की ओर से जारी की गई मासिक आर्थिक समीक्षा में दी गई।
रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च में मांग मजबूत बनी हुई है, जो वाहनों और ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री से स्पष्ट होता है।
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि आने वाले समय में मांग और आर्थिक गतिविधियां, इनपुट प्राइस और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव से निर्धारित होंगी। हालांकि, मध्यपूर्व में 2026 की दूसरी छमाही में स्थिति में सुधार हो सकता है।
समीक्षा में चेतावनी दी गई कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ने से 2026-27 में राजस्व प्राप्ति और व्यय प्रतिबद्धताओं दोनों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इसमें राज्यों की राजकोषीय स्थिति का आकलन करने का भी जिक्र किया गया है, क्योंकि कुल सार्वजनिक व्यय में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
रिपोर्ट में बताया गया कि उभरती हुई चुनौतियों के बाद भी केंद्र इस वित्त वर्ष में विवेकपूर्ण स्थिति के साथ प्रवेश कर रहा है। हाल के वर्षों में अपनाई गई राजकोषीय समेकन के साथ, बजट में सकल कर राजस्व में 0.8 की वृद्धि दर का अनुमान (जो ऐतिहासिक औसत से कम है) और सार्वजनिक खाते में आर्थिक स्थिरीकरण कोष का निर्माण, राजकोषीय हस्तक्षेपों के लिए गुंजाइश प्रदान करता है।
हालांकि, समीक्षा में मध्य पूर्व संघर्ष के लंबे समय तक चलने की स्थिति में ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति में अनिश्चितता के जोखिम का भी जिक्र किया गया है। इससे मुद्रास्फीति, राजकोषीय और बाह्य घाटे के लिए जोखिम बढ़ने की संभावना है, जबकि आर्थिक विकास के लिए जोखिम घटने की संभावना है। हालांकि, आर्थिक विकास को बनाए रखने के प्रयास के साथ-साथ, नीति से मध्यम अवधि की राजकोषीय और बाह्य स्थिरता की रक्षा करने की उम्मीद है।
बाह्य क्षेत्र के रुझानों का हवाला देते हुए, समीक्षा में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2025 में 283.5 अरब डॉलर था। वहीं, कुल व्यापार घाटा इसी अवधि में 94.7 अरब डॉलर से बढ़कर 119.3 अरब डॉलर हो गया। समीक्षा में आगे कहा गया है, “यह प्रवृत्ति वित्त वर्ष 2027 में भी जारी रहने की संभावना है, जिसमें घाटा और भी अधिक बढ़ेगा, साथ ही चालू खाता घाटा भी अधिक होगा।”
इसके अतिरिक्त, समीक्षा में बताया गया है कि युवाओं में एआई-सुरक्षित, टिकाऊ व्यापार कौशल को बढ़ावा देने से घरेलू विनिर्माण और सेवाओं को समर्थन मिलेगा और साथ ही निर्यात के अवसर भी पैदा होंगे।
–आईएएनएस
एबीएस/
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

